रंगीन उज्जवल फूलों के गुलदस्तों से सजी हुई लखनऊ की फूलों की बाज़ारें अब व्यावसायिक गतिविधियों की कमी के चलते खाली पड़ी रहती हैं। महामारी के कारण लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित फूल विक्रेता तेज़ी से बिक्री में कमी और फूलों के रखे हुए स्टॉक के बीच आर्थिक कठिनाईयों का सामना करने पर मजबूर हैं। शादियों, सामाजिक समारोहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों और धार्मिक स्थानों पर प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण फूलों की दुकानें लगातार दूसरे साल आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।

फूलों का कारोबार इस समय पूरी तरह ठप


ऐसी विषम परिस्थितियों में अपनी मुश्किलों को बयान करते हुए रविंद्र ने बताया की, मेरी फूलों की दूकान मनकामेश्वर मंदिर पर सोमवार को और हनुमान सेतु मंदिर पर मंगलवार को और गुरूवार को साईं मंदिर पर और शनि मंदिर पर शनिवार को लगती है। पहले मैं ताज़े फूल ख़रीदता था और वे एक हफ्ते चलते थे अब मेरे फूल और उम्मीदें दोनों मुरझाई हुई हैं। श्रद्धालु अब मंदिर नहीं आते हैं और जो आते भी हैं वे फूल और प्रसाद नहीं खरीदते क्यूंकि मंदिर के अंदर उनका प्रवेश निषेध है।

राज्य में बढ़ते हुए संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने सिर्फ 5 लोगों के एक बार में मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति दी है। इसीलिए शहर के अधिकतर मंदिरों की सीमाओं को बंद कर दिया गया है। अब रवींद्र की कमाई नगण्य स्तर तक गिर गई है, जबकि उसकी महामारी से पहले लगभग 800 से 900 रुपये की दैनिक आय हुआ करती थी। विकल्पों की कमी के बीच आर्थिक तंगी से झूझ रहे रवींद्र को उम्मीद है की लॉकडाउन खुलने के बाद वो ट्रैफिक सिग्नल पर खिलौने बेचने का काम करेंगे।

फूल पत्तियों के साथ उम्मीदें भी मुरझाई


श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय 'सीताराम' , हनुमान सेतु मंदिर पर चमेली के फूल बेचा करते थे लेकिन अब उनकी फूलों की दूकान बंद रहती है। क्यूंकि चमेली के फूल बहुत जल्दी मुरझा जाते हैं इसी कारण से इस समय फूलों के व्यापार को चलाना बहुत ही मुश्किल है। उन्होंने यह बताया की वह उम्मीद करते है की प्रतिबंधों के हटने के बाद फिर से काम शुरू कर सकेंगे।

चौक इलाके में एक और लोकप्रिय मंदिर है जो आगंतुकों की भीड़ से भरा रहता है पर आज कल अक्सर बंद रहता है। मंदिर के पुजारी राम प्रसाद का कहना है की मंगलवार और गुरूवार को 90-100 किलो फूलों के स्टॉक से भरा रहता था। मंदिर के कार्य पूरे होने के बाद इन फूलों को महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप को दे दिया जाता था जहां वे इन फूलों की सहायता से अगरबत्तियां बनाती थीं, लेकिन अब लॉकडाउन के कारण महिलाओं का काम और कमाई दोनों बंद हो गयी हैं।

शादी का सीजन और आने वाले त्योहारों को देखते हुए मुनाफा न के बराबर


फूल विक्रेताओं ने ज्येष्ठ के महीने में मंगलवार के दिनों को धूम धाम से मनाये जाने वाले बड़े मंगल के त्यौहार पर चल रहे लॉकडाउन के प्रभावों पर अपना दुःख और भय प्रकट किया। यह त्यौहार 21 मई को शुरू हो रहा है और लोग चढ़ावे के तौर पर हनुमान जी के मंदिरों को गेंदें के फूलों से सजाते हैं। चौक के हनुमान मंदिर के पुजारी ने कहा अगर ये प्रतिबन्ध लागू रहते हैं तो हमारे व्यवसाय को भारी नुक्सान होगा। ये लगातार दूसरी बार होगा की बड़ा मंगल पारम्परिक तरीके से नहीं मनाया जाएगा।

इसके अलावा शादियों में होने वाली बिक्री को भी लेकर फूल विक्रेता चिंता में हैं। फूलों की सजावट में गिरावट का मुख्य कारण शादियों में सीमित मेहमानों की अनुमति है और अगर प्रतिबन्ध नहीं हटाए गए तो बिना कोई मुनाफा हुए ही शादियों का सीजन निकल जाएगा और इस सीजन के ख़तम होने के बाद दोबारा शादियों का समय सीधा नवंबर में ही आएगा।

सार्वजनिक समारोह पर प्रतिबन्ध लगने के कारण गुलदस्तों और मालाओं की बिक्री में काफी गिरावट है। भारी नुकसान से परेशान, फूल उद्योग को जीवित रहने में बहुत मुश्किल हो रही है। इस व्यवसाय को पुनर्जीवित करने से पहले इसमें बहुत अधिक समय और प्रयास की आवश्यकता होगी।

वर्तमान स्थिति में ये ज़रूरी है की लोकल विक्रेताओं और छोटे उद्यमों का सहयोग किया जाए ताकि सब व्यवसाय के लोग कम से कम अपना जीवन यापन कर सकें। जब हम इस समय उन ज़रूरतमंदों की सहायता करेंगे जो हमारे सामाजिक आर्थिक सिस्टम का हिस्सा हैं तभी हम इस माहमारी की कठिनाईयों की बीच से उम्मीद और बढ़ोतरी का एक रास्ता निकाल पाएंगे। हम सब मिलकर यही उम्मीद करते हैं की ये मुश्किलों के बादल हम सब के ऊपर से जल्दी छटें और शहर की रंगीन दुकानों की चमक वापस आ सके।