लखनऊ में छोटे इमामबाड़ा के दोनों दरवाजे बदहाली की मार झेल रहे है। यह ऐतिहासिक 200 साल पुराने हुसैनाबाद दरवाजे अब अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। मुगलों और नवाबों के कार्यकाल के दौरान हिंदुस्तान में कई ऐसी बेशकीमती और ऐतिहासिक इमारतें हैं जो आज भी देश की मुख्य धरोहरों में अपनी खास पहचान रखती हैं। जिसमें से लखनऊ के छोटे इमामबाड़े के यह दोनों मुख्य द्वार सबसे अहम है।


लखनऊ के छोटे इमामबाड़ा स्थित हुसैनाबाद के दोनों गेट जर्जर है। कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। बारिश के मौसम की वजह से गेट में नमी बैठ रही है, उसका सीमेंट, पेंट उखड़ चूका है। दोनों दरवाजों में बड़ी बड़ी दरारें हैं और मरम्मत न होने के कारण दरवाजे बेहद कमजोर हो चुके हैं।


कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। आसपास के लोगों का कहना है की इन दरवाजों की मरम्मत का काम बहुत सालों से नहीं हुआ है, और जिस तरह से इसकी हालत है दरवाजे के आसपास बेहद खतरा है। हुसैनाबाद ट्रस्ट के अधीन इन दोनों दरवाजों पर अतिक्रमण भी है, और दरवाजे के निचे से गाड़ियां गुजरने से गेट में कंपन भी महसूस होती है जो की एक खतरे का संकेत है।

बेगमात रॉयल फैमिली की नेशनल प्रेसिडेंट प्रिंसेस फरहाना मालकी (Princess Farhana Maliki.National President of Begamat Royal Family) ने कहा कि इन दरवाजों गेट की मरम्मत नहीं करवाई तो यह दरवाजे गिर जाएंगे और लोगों की जान भी जा सकती है। इन दोनों दरवाजों के निचे से भारी मात्रा में ट्रैफिक गुजरता है।


उन्होंने ट्रस्ट के चेयरमैन और डीएम से जल्दी मरम्मत कराए जानें की मांग की है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया डिपार्टमेंट ने कहा कि इस गेट का संरक्षण का कार्य (ASI) के अंतर्गत नहीं आता है। हुसैनाबाद ट्रस्ट की प्रभारी किंशुक श्रीवास्तव ने बताया की मरम्मत की कोशिश की जा रही है। अतिक्रमण भी जल्द हटाया जाएगा।