पिछले कुछ दिनों में कोरोना संक्रमण के आंकड़ों में काफी गिरावट देखी जा रही है, और इसी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने महामारी के व्यवस्थित प्रबंधन के लिए टीम 9 को आवश्यक निर्देश दिए हैं। 30 अप्रैल को 3.10 लाख सक्रीय मरीज़ों के दर्ज होने के बाद यह संख्या 20 दिनों में कम होकर 1.25 लाख तक आ गयी। इसके अलावा 14.83 लाख लोगों ने कोरोना के खिलाफ अपनी जंग जीत ली है और अब, यूपी प्रशासन का लक्ष्य निम्नलिखित 7 उपायों के माध्यम से कोरोना संक्रमण पर अपनी पकड़ और मजबूत करना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक टेस्टिंग


राज्य सरकार ने ग्रामीण और दूर दराज़ के क्षेत्रों में टेस्टिंग को बढ़ाने का संकल्प लिया था और यूपी देश भर में टेस्टिंग में सबसे आगे रहा है। राज्य ने अपने ग्रामीण क्षेत्रों में आरएटी और उसके बाद के आरटी-पीसीआर टेस्टिंग को बड़े पैमाने पर चलाया है। इन कदमों के साथ, अधिकारी वायरस को ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ने से रोककर संक्रमण के प्रसार को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

विस्तृत टेलीकंसल्टेशन सेवाएं


इस समय यूपी के विभिन्न जिलों में करीब 1 लाख लोग होम आइसोलेशन में हैं और इस बात को मद्देनज़र रखते हुए अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया है की टेलीकंसल्टेशन की सुविधाओं में कोई कमी न रहने पाए। प्रारंभिक रूप से मरीज़ आईसीसी या फिर सीएमओ हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके आवश्यकता अनुसार परामर्श ले सकते हैं। इसके अलावा अधिकारी मॉनिटरिंग समिति के माध्यम से दवाइयों के पैकेटों को ज़्यादा से ज़्यादा वितरित करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

पीडियाट्रिक वार्ड स्थापित किए जा रहे हैं


तीसरी कोरोना लहर से बच्चों को होने वाली संभावित परेशानियों से चिंतित होकर राज्य ने अपने प्रयासों को इस ओर भी केंद्रित किया है और इसी के चलते राज्य के हर मेडिकल कॉलेज में 100 पीडियाट्रिक बेड लगाए गए हैं। इसके अलावा साथ ही पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट), एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) और एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट) की भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। लक्षित कोशिशों के माध्यम से, राज्य अपने बच्चों को घातक संक्रमण से बचाने का प्रयास कर रहा है।

'ब्लैक फंगस' के खिलाफ केंद्रित कदम


सीएम ने प्रशिक्षित और अनुभवी डॉक्टरों को 'ब्लैक फंगस' के मामलों को देखने के निर्देश दिए हैं। रोगियों के उचित उपचार के लिए अस्थायी आदेशों के अलावा, राज्य ने अनियंत्रित वृद्धि की संभावनाओं को कम करने के लिए 14 स्वास्थ्य अधिकारियों की एक विशेषज्ञ समिति भी बनाई है। वे एहतियात और रोकथाम के तरीकों के साथ राज्य में संक्रमण से निपटने के लिए एक मजबूत कार्य योजना तैयार करेंगे।

टीकाकरण- सर्वोच्च प्राथमिकता


अपर मुख्य सचिव सूचना, नवनीत सहगल ने बताया, "45 वर्ष से अधिक और 18-44 आयु वर्ग के लोगों को कोविड सुरक्षा कवर प्रदान करने में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है।" टीकाकरण के पहले तीन चरणों में व्यापक अभियान चलाये गए थे और राज्य ने वर्तमान चरण में समान जोश के साथ प्रवेश किया है। साथ ही निरक्षर, दिव्यांग, बेसहारा या अन्य जरूरतमंद लोगों को कॉमन सर्विस सेंटर में सुविधाओं के माध्यम से रजिस्टर किया जा रहा है।

सुरक्षित दाह संस्कार का आश्वासन


हाल ही की रिपोर्ट में लोगों के मृत अवशेषों का बुरी तरह से निष्कासन होना राज्य सरकार के लिए खतरे की घंटी है। इसीलिए, प्रशासन ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि शवों को नदियों और अन्य जल निकायों में न डाला जाए। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने सुरक्षित और उचित दाह संस्कार और दफनाने की प्रक्रियाओं के लिए मौद्रिक सहायता प्रदान करने का भी संकल्प लिया है।

एलएमओ उपयोग को व्यवस्थित करेगा ऑक्सीजन ऑडिट


अनियंत्रित ऑक्सीजन सप्लाई की कमी को पूरा करते हुए IIT कानपूर द्वारा एक ऑक्सीजन प्लेटफार्म शुरू किया गया है ताकि दुर्लभ संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो सके। शुरू होने के कुछ दिनों के अंदर ही कार्यक्रम ने डिमांड और सप्लाई के बीच संतुलन को बढ़ाया है और प्रभावी प्रयासों को साथ , राज्य सरकार ने सभी जिलों को वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर भी प्रदान किये हैं और अधिकारियों को सभी उपकरणों की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए कहा है।

Knock Knock

इस सब भरपूर प्रयासों के बावजूद अभी राज्य में सामन्य स्थिति और स्थिरता को बनाने में काफी समय लग जाएगा। इसलिए, इस समय सावधानी बरतना और सभी दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना महत्वपूर्ण है और यह याद रखना ज़रूरी है कि यदि नागरिकों का सहयोग राज्य की कोशिशों के साथ जुड़ता है तो राज्य के उपाय कई गुना बढ़ जाएंगे।