सभी के लिए खाने की भरपूर सप्लाई सुनिश्चित करने की ज़रुरत पर ध्यान देते हुए, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि प्रत्येक राज्य के सभी जिलों में सामुदायिक रसोई कार्यात्मक होनी चाहिए। यह कदम राज्य प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया जा रहा है कि किसी भी व्यक्ति को मौजूदा कोरोना संकट के बीच अनेक परेशानियों के साथ भूख की लड़ाई न लड़नी पड़े। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ये सामुदायिक रसोइयां घर में रहने वाले लोगों और समाज के सभी जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराएंगी।

सभी औद्योगिक यूनिट को पर्याप्त मात्रा में खाने के संसाधन रखने को कहा गया है।



यह कहा गया है कि कृषि उत्पादन कमीशनर को इस संबंध में आवश्यक उपाय करने होंगे। राज्य के सभी औद्योगिक केंद्रों को यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय करने चाहिए कि उनके श्रमिकों के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन हो। महामारी की पहली लहर के दौरान, सरकार द्वारा लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों के दौरान दैनिक मजदूरी करने वाले मजदूर और प्रवासी श्रमिक जीवित रहने के लिए संघर्ष करते थे। वर्तमान में, राज्य गुरुवार सुबह तक लॉकडाउन के तहत बंद है।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज़ों के लिए ऑक्सीजन के निरंतर स्टॉक की गारंटी के लिए ज़रूरी कदम उठा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने घर में रहने वाले व्यक्तियों की मांगों का ध्यान रखने के लिए विशिष्ट रीफिलिंग एजेंटों को नियुक्त किया है। दूसरी लहर में मेडिकल सप्लाई की कमी ने भी कोरोना रोगियों की हालत को बहुत प्रभावित किया है।

बढ़ते आंकड़ों को रोकने के लिए आवश्यक सख्त उपाय।



आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, मंगलवार को लखनऊ और कानपुर में 2,407 और 2,697 नए कोरोना मामले दर्ज किए गए थे। हालाँकि,आंकड़े नीचे की ओर जाते हुए दिख रहे हैं फिर भी प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि किसी भी प्रकार की कमी आंकड़ों को आगे ना बढ़ने दे। गंभीर तौर पर देखा जाए तो 22 लोग लखनऊ में घातक वायरस का शिकार हुए और पिछले 24 घंटों में कानपुर में 66 लोगों की जान चली गई।