लखनऊ का ऑल सेंट्स गैरिसन चर्च शहर के कैंटोनमेंट इलाके में एक शानदार भवन के रूप में शोभायमान है. जो की आगंतुकों को अपने रहस्य्मय प्रतिरूप से वर्षों से लुभाता आ रहा है, और इसकी भव्यता में वास्तव में प्रगतिशाली विशेषताएं हैं। हालाँकि आज इस लाल पत्थर की संरचना अपनी महिमा दर्शाती है, यह प्रारंभिक रूप से एक छोटा प्रार्थना करने का स्थान हुआ करता था, जो बाद में शांति, एकांत और भव्यता के शानदार प्रतीक में पुनः निर्मित किया गया।

चलिए थोड़ा सा समय के पहिये को उल्टा घुमाते हैं. और जानते हैं की ऑल सेंटस गैरिसन चर्च इतना भव्य कैसे हुआ।



अवध की घेराबंदी के बाद अंग्रेज़ों ने रेजीडेंसी को छोड़ लखनऊ कैंटोनमेंट को अपनी नयी बस्ती के रूप में अधिग्रहित किया। जैसे जैसे बस्ती बढ़ती गयी वैसे वैसे यहां तैनात रहने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ती गई, और ज़ाहिर था एक बड़ी चर्च की आवश्यकता थी। इसी के परिणाम स्वरुप 1908 में यह छोटी चर्च ऑल सेंटस गैरिसन चर्च के रूप में परिवर्तित हो गयी।

यदि कोई नए चर्च के उत्तर-पश्चिम कोने की ओर लगभग 15 से 20 फीट तक चलता है, तो उन्हें एक पत्थर नज़र आएगा जो पुराने चर्च के शुरुआती स्थान को प्रतीक है, जिसका निर्माण 1860 में किया गया था। इस दिलचस्प तथ्य के साथ, चर्च में बहुत कुछ है, जो आगंतुकों को आश्चर्यचकित कर सकता है। इस जगह की सबसे विचित्र विशेषताओं में से एक यह है कि यहां प्रार्थना करने वालों को अपने साथ गोला-बारूद ले जाने की अनुमति है।



ये विचित्र रिवाज़ आवश्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु पुराने समय में शुरू किया गया था। 1857 के विद्रोह के दौरान क्रांतिकारी हमला करने के लिए चर्च के परिसर में घुस जाते थे और कई अंग्रेज़ अधिकारियों ने अपनी जान गवाई। चर्च में बैठने की व्यवस्था भी इसी पहलु के अनुरूप बनायीं गयी, चैपल की सभी बेंचों के पीछे बंदूकों को रखने के लिए खांचे बने हुए हैं। आपात स्थिति में ऑन ड्यूटी सैनिकों को हथियार के साथ प्रार्थना करने की अनुमति थी।

लखनऊ की सबसे बड़े चर्च का सौंदर्य।



चर्च की प्रारंभिक डिज़ाइन, ब्रिटिश इंजीनियर जोन्‍स रैनसम द्वारा तैयार किया गया था, जिन्होंने स्कॉटलैंड के सेंट मुंगो चर्च को भी डिज़ाइन किया था, जिसे लिशमैन और जॉन बग्गस द्वारा पूरा किया गया, जिन्होंने इसकी अलंकरण (ornamentation) को बजट की मांग को पूरा करने के लिए कम किया। जानकारी के अनुसार मुख्य टावर की लम्बाई, चौड़ाई और साइड की दीवारों की बारीकियां कम की गयी थी जिससे संरचना की लागत कम की जा सके।

यह 91,000 रुपए की राशि में बनाया गया था, और परिवर्तनों के बावजूद, चर्च बेहद शानदार दिखता है। आज भी, यह शहर का सबसे बड़ा चर्च है, जिसे काफी दूर से देखा जा सकता है। यह स्थान शहर की हलचल से एकांत और अलगाव में है और यदि आप शोर शराबे के बीच एकांत की तलाश में हैं, तो यह जगह आपके लिए सबसे अनुकूल है।

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