लखनऊ विश्वविद्यालय ने फार्मेसी के छात्रों के लिए एक समर्पित इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज शुरू करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय जानकीपुरम में अपने दूसरे परिसर के 8,170 वर्ग मीटर में इस संस्थान को खोलने के लिए तैयार है। कथित तौर पर, वित्त समिति ने संस्थान को इंजीनियरिंग फैकल्टी के सब -सेट के रूप में शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव को अब अंतिम मंजूरी के लिए 11 जून को कार्यकारी समिति के समक्ष रखा जाएगा।

महामारी की घड़ी के बीच फार्मेसी संस्थान की जरूरत

प्रस्तावित आईपीएस को तीन मंजिला हाईटेक भवन के रूप में बनाया जाएगा। इस संस्थान में 4 बेहतरीन और आधुनिक लैब होंगी, जिससे इसे जल्द ही एक डेडिकेटेड रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित होने का लाभ मिलेगा। संस्थान एक सिंगल यूनिट होगा जहां सूक्ष्म जीव विज्ञान, फार्मास्युटिकल रसायन विज्ञान, केंद्रीय उपकरण, जैव प्रौद्योगिकी, मानव शरीर रचना विज्ञान और फार्माकोग्नॉसी के लिए लैब सुविधाएं होंगी।

आईपीएस के निदेशक नवीन खरे ने कहा, “संस्थान का मुख्य उद्देश्य फार्मेसी शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करना है, स्वास्थ्य और दवा की खोज को आगे बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक रिसर्च की ओर और काम करना है जो कि कोविड महामारी के समय की आवश्यकता है। फार्मास्युटिकल , बायोमेडिकल, और क्लिनिकल साइंस में इनोवेटिव रिसर्च ही केंद्र का फोकस होगा। “केंद्रों के निर्माण को पूरा करने के लिए एक साल की समय सीमा का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। तब तक इंजीनियरिंग फैकल्टी में फार्मेसी की कक्षाएं चलती रहेंगी।

आईपीएस में कराये जाएंगे ये कोर्स 

आधिकारिक जानकारी से पता चला है कि लखनऊ विश्वविद्यालय का फार्मास्युटिकल साइंसेज संस्थान दो सेल्फ फाइनेंस कोर्स कराएगा जिनमें – 100 सीटों के साथ बैचलर इन फार्मेसी (बी.फार्मा) और 60 सीटों के साथ डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी.फार्मा) शामिल है। इन कार्यक्रमों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय 33 कॉन्ट्रैक्ट पर फैकल्टी की नियुक्ति करेगा। बी.फार्मा कोर्स 4 वर्षीय (आठ-सेमेस्टर) कार्यक्रम होगा, जबकि डी.फार्मा 2-वर्षीय, वार्षिक पैटर्न पाठ्यक्रम होगा।

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के विश्वविद्यालय को अंतिम मंजूरी देने के बाद 2020-2022 के सेशन के लिए दो कोर्स के आवेदन जल्द ही शुरू होंगे। IPS में फार्मास्यूटिक्स, फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी और फार्माकोग्नॉसी सहित कुल 4 विभाग चलेंगे। यह भारतीय फार्मेसी परिषद, नई दिल्ली की नीति के अनुसार दो साल के बाद एम.फार्मा कोर्स भी शुरू कर सकता है।

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