महामारी और लॉकडाउन के कारण कई महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड जैसे आवश्यक उत्पादों से वंचित रहने पर मजबूर हैं और ऐसी स्थिति में उनके लिए अपनी स्वच्छता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है। मासिक धर्म समानता स्थापित करने के प्रयास में, गर्लअप इंडिया (GirlUp India) और प्रोजेक्ट बाला (Project Baala) ने मिलकर एक पैन इंडिया फंडरेजर कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाने के लिए हाथ मिलाया है।

फंडरेजिंग कार्यक्रम के एक भाग के रूप में, गर्लअप लखनऊ 30 मई को MERAKI का आयोजन कर रहा है। इस आयोजन से प्राप्त धनराशि का उपयोग, लखनऊ में ज़रूरतमंद लड़कियों और महिलाओं को पैड दान करने मे किया जाएगा। यदि आप भी समाज सेवा के कार्य से जुड़ना चाहते हैं, तो निश्चित रूप से आपको इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना चाहिए। 

अपनी प्रतिभा को निखार कर जुड़ें इस पहल से!

गर्लअप लखनऊ, गर्लअप इंडिया के पैन इंडिया फंडरेजर अभियान के तहत 30 मई को MERAKI, एक ओपन माइक कार्यक्रम की मेजबानी कर रहा है। महामारी की स्थिति में सुधार होने पर, इस आयोजन से प्राप्त आय का उपयोग लखनऊ में वंचित लड़कियों और महिलाओं को सेनेटरी पैड दान करने में किया जाएगा।

इस अभियान का लक्ष्य हर महीने महावारी से गुज़रने वाली महिलाओं को सही संसाधनों उपलब्ध करवाना और उन्हें जागरुक करके सशक्त बनाना है, ताकि उनके पीरियड्स उनके सपनों, आकांक्षाओं और जीवन में बाधा न पाएं। गर्लअप लखनऊ की अध्यक्ष मंशा ममगाईं ने इस आयोजन का संचालन इस विश्वास के साथ कर रही हैं कि, महावारी के समय अपनी गरिमा और सुरक्षा बनाए रखना महिलाओं का बुनियादी मानव अधिकार है।”

महिलाओं की सुरक्षा और स्वच्छता के लिए वितरित किए जाएंगे हाईजीन किट

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गर्लअप इंडिया के ‘प्रोजेक्ट अधिकार’ के तहत, 150 से अधिक किशोर, 10 भारतीय शहरों में वंचित समुदायों में ऐसे सेनेटरी पैड वितरित करेंगे जिनसे पर्यावरण को नुकसान न हो। यह अभियान 28 मई को प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। अधिक से अधिक मासिक धर्म हाईजीन किट (menstrual hygiene kits) सफलतापूर्वक दान करने के लिए, गर्लअप इंडिया ने- प्रोजेक्ट बाला के सहयोग से, मिलाप पर एक वर्चुअल फंडरेज़र शुरू किया है।

संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन की पहल, गर्लअप का यह छात्र-नेतृत्व वाला समुदाय लड़कियों के कौशल, अधिकार और जीवन में आगे बढ़ने के अवसरों को बढ़ावा देने लिए, वैश्विक स्तर पर काम कर रहा है। उनके कार्यक्रमों ने “लगभग 126 देशों में 4,500 क्लबों के माध्यम से 85,500 लड़कियों” को प्रभावित किया है और हर जगह लड़कियों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं!

नॉक-नॉक


एनएफएचएस -4 के अनुसार, सेनेटरी पैड जैसे आवश्यक महावारी उत्पादों की अनुपलब्धता के कारण भारत में 23 मिलियन से अधिक लड़कियां महावारी के कारण स्कूल जाना छोड़ देती हैं। इसके अलावा, केवल 36% महिलाएं महावारी के समय सुरक्षित उत्पादों का प्रयोग कर पाती हैं, वहीं कई अन्य महिलाएं मासिक धर्म के दौरान राख, भूसा, पुराने और गंदे कपड़े जैसे अस्वच्छ तरीकों का उपयोग करने पर मजबूर हैं। इस तरह के अस्वच्छ तरीकों के उपयोग से महिलाओं के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। ‘प्रोजेक्ट अधिकार’ के साथ जुड़कर आप एक जीवन बचाने में और बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं!

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