शहरवासियों के लिए सबसे बड़े आकर्षणों में से एक, लखनऊ चिड़ियाघर को बने हुए इस साल 29 नवंबर को 100 साल पूरे हो जाएंगे। इसी अवसर के चलते अधिकारियों ने इसके परिसर में एक ‘शताब्दी स्तंभ‘ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह स्तम्भ चिड़ियाघर की लंबी यात्रा के प्रमाण के रूप में स्थापित किया जाएगा। स्तंभ के दोनों तरफ शिलालेख होंगे। एक तरफ जहां लखनऊ चिड़ियाघर का इतिहास तराशा जाएगा, वहीं दूसरी तरफ इसके उद्घाटन की तारीख होगी।

स्मृति चिन्ह और एक डाक टिकट जारी किया जाएगा

शताब्दी समारोह के सम्बन्ध में चिड़ियाघर के अधिकारियों ने कई योजनाओं की तैयारी शुरू की है। इसके एक हिस्से के रूप में, चिड़ियाघर के लोगो के डिजाइन को कॉपी करते हुए एक डाक टिकट जारी किया जाएगा। इसके अलावा, अतीत और वर्तमान से आगंतुकों द्वारा क्लिक की गई तस्वीरों के ज़रिये विशेष यादों को भी सार्वजनिक किया जाएगा। जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, चिड़ियाघर के अधिकारियों ने नागरिकों से उन चीजों के बारे में अपनी सिफारिशें देने को कहा है जो यादगार वस्तुओं का हिस्सा हो सकती हैं।

इसके अलावा, चिड़ियाघर में छात्रों और युवाओं के लिए कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। चिड़ियाघर के निदेशक आर.के. सिंह ने कहा, “आगंतुकों के लिए कई प्रतियोगिताएं और कार्यक्रम होंगे। यह वर्ष हमारे साथ-साथ कैदियों के लिए भी बहुत खास है। हम लोगों को एडॉप्शन के कार्यक्रम को चुनने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।”

‘बनारसी बाग’ से ‘नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल गार्डन’ तक

प्रिंस ऑफ वेल्स की लखनऊ यात्रा के उपलक्ष्य में 29 नवंबर, 1921 को जूलॉजिकल गार्डन की स्थापना की गई थी। इससे पहले, परिसर को 18 वीं शताब्दी में अवध के तत्कालीन नवाब नसीरुद्दीन हैदर द्वारा आम के बाग के रूप में विकसित किया गया था। बनारसी बाग का नाम उस समय के दौरान रखा गया था, इस उद्यान को आज भी कुछ स्थानीय लोगों द्वारा उसी नाम से जाना जाता है। पार्क के विस्तार में बीच में एक बारादरी है, जहाँ नवाबी समय की प्राचीन आभा देखने को मिलती है।

गवर्नर सर हरकोर्ट बटलर के विचारों के आधार पर, उद्यान को 1921 में एक पशु आश्रय में बदल दिया गया था। बाद में दो बार नाम बदला गया। जबकि ‘प्रिंस ऑफ वेल्स जूलॉजिकल गार्डन ट्रस्ट’ का नाम बदलकर 2001 में लखनऊ जूलॉजिकल गार्डन कर दिया गया, इसका वर्तमान नाम नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल गार्डन 2015 में रखा गया।

नॉक नॉक

हम भी शहर की इस असाधारण विरासत के संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं यदि हम यह ध्यान रखें की हमारी वजह से इसके परिसर की सफाई में खलल न पड़े। यहां, चिड़ियाघर के बताए गए नियमों और विनियमों के बारे में जागरूकता फैलाना महत्वपूर्ण है, साथ ही उनका पालन होना भी ज़रूरी है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *