कोरोना वायरस के संक्रमण से लोग शारीरिक तकलीफ से तो गुजरे ही हैं इसके साथ ही इस संक्रमण ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाला है। कोरोना के बाद किसी को नींद नहीं आ रही तो कोई अवसाद से परेशान है। इसी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, लखनऊ के रेलवे अस्पताल के अधिकारियों ने कोविड देखभाल केंद्र में मानसिक स्वास्थ्य रोगियों के इलाज के लिए एक अलग वार्ड की स्थापना की है। पोस्ट-कोविड वार्ड में यह नया वार्ड उन सभी रेल कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों का इलाज करेगा, जो संक्रमण के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

अस्पताल में विकसित किया गया 30 बेड का अलग पोस्ट-कोविड वार्ड

दुर्भाग्यपूर्ण दूसरी कोरोना लहर में रेलवे के कई कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य संक्रमित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 100 से अधिक लोगों की वायरस के कारण मृत्यु हो गयी। इन लोगों में लोको पायलट के रिश्तेदार और दुसरे विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। संक्रमित होने के बाद जो लोग रिकवर हो गए उन्हें इंसोमनिया (Insomnia) और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी सम्बन्ध में, कर्मचारियों ने रेलवे के डॉक्टरों से संपर्क किया और रेलवे विभाग ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कदम उठाया।

हालाँकि अस्पताल के चेस्ट और रेस्पिरेटरी ब्लॉक में कोरोना संक्रमित मरीज़ रहेंगे लेकिन पोस्ट कोविड समस्याओं से जूझ रहे मरीज़ों के लिए एक अलग केंद्रित वार्ड तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस नए वार्ड में कुल 30 बिस्तर हैं, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे रोगियों के लिए इलाज की सुविधा प्रदान करेंगे। अधिकारियों ने प्रशिक्षित मानसिक-स्वास्थ्य विशेषज्ञों को तैनात करने की योजना बनाई है और ऐसे रोगियों के लिए परामर्श सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी। इस संबंध में डीआरएम मुख्यालय पहले ही रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेज चुका है। 

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