उत्तर प्रदेश में मेडिकल रिसर्च और विकास को मजबूत करते हुए, आईसीएम्आर ने लखनऊ में एक सर्वोत्तम माइकोलॉजी डायग्नोस्टिक एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी है। यह राज्य में अपनी तरह की पहली सुविधा होगी। यह नया केंद्र किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्थापित किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस केंद्र में घातक ब्लैक फंगस सहित कई फंगल संक्रमणों का अध्ययन किया जाएगा।

फंगल रोगों से संबंधित अनेक अध्ययन करेगा माइकोलॉजी केंद्र

कथित तौर पर, इस केंद्र पर गहन और केंद्रित परीक्षण आयोजित करने के लिए मॉलिक्यूलर और जेनेटिक टेस्टिंग की जायेगी। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि रोगी के रक्तप्रवाह में एंटी-फंगल दवाओं के स्तर को मापने के लिए टेस्ट भी यहां उपलब्ध होंगे। इन्ही टेस्टों के परिणामों के ज़रिये डॉक्टर सटीक खुराक के बारे में निर्णय लेने में सक्षम होंगे। इसके अलावा ऐंटिफंगल दवाओं के साइड इफेक्ट और उनसे जुड़ी अन्य समस्याओं का भी अध्ययन किया जाएगा।

अब तक केजीएमयू में ब्लैक फंगस के 400 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं जबकि यह बीमारी पूरे देश में कहर बरपा रही है। कोविड के बाद के रोगियों में कई फंगल रोगों के आगमन को देखते हुए, रोगों के कारणों की जांच और विश्लेषण करने की तत्काल आवश्यकता है।

देश में 13 केंद्रों को जोड़ेगी नयी सुविधा

वर्तमान में, देश में ऐसी 13 अत्याधुनिक लैब्स हैं और यह नई सुविधा इस क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने में मदद करेगी। जबकि चल रही महामारी ने अधिक से अधिक इलाज की सुविधाओं की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है, वहीँ पर एक बेहतर रिसर्च इकोसिस्टम की आवश्यकता को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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