लखनऊ के मालिहाबाद से ताल्लुक रखने वाले पद्मश्री विजेता ‘हाजी कलीमुल्ला खान’ (Kaleem Ullah Khan) एक ही पेड़ पर नई ग्राफ्टिंग तकनीकों के माध्यम से आम की 300 से अधिक किस्मों को उगाने के लिए जाने जाते हैं। कोरोना महामारी के चलते अब तक कई कोविड फ्रंटलाइन वर्कर भी अपनी जान गंवा चुके हैं, जिसमें कई डॉक्टर, पुलिस के साथ साथ मेडिकल स्टॉफ भी शामिल है। उन्होंने हाल ही में कोविड फ्रंटलाइन वर्कर्स को श्रन्धांजलि देने के लिए आम की कुछ किस्मों के नाम को उन कोरोना योद्धाओं के नाम पर रखा और अपने अनोखे अंदाज में श्रद्धांजली दे रहे हैं। पद्मश्री कलीमुल्ला ने अपनी नर्सरी में आम की कुछ वैराइटी के नाम अब दिवंगत कोरोना वॉरियर्स के नाम पर रख दिए हैं, ताकि उन्हें हमेशा याद रखा जा सके।

आम की किस्मों को कोरोना योद्धाओं के नाम पर समर्पित करने का उद्देश्य उनकी निःस्वार्थ तपस्या और बलिदान को सदियों के लिए अमर करना है। इसके अलावा, कुछ किस्मों का नाम उन प्रसिद्ध हस्तियों के नाम पर भी रखा गया है जिन्होंने विशेष उपलब्धियां हासिल की हैं।

लोकप्रिय हस्तियों के नाम पर आम की किस्में 

कलीमुल्लाह खान ने आम की नयी किस्में पेश की हैं, जिन्हें उन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर्स- डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों को समर्पित किया है। कई कोरोना योद्धाओं के निधन ने पूरे भारत में लोगों को दुखी किया है, हालांकि, खान की यह पहल इन योद्धाओं के बलिदान की कहानी को आने वाली पीढ़ियों तक अमर कर देगी। कोरोना योद्धाओं के अलावा, कुछ किस्मों का नाम भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री और अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों के नाम पर रखा गया है।

कलीमुल्लाह खान ने अपने बाग में दशहरी आम की एक नई प्रजाति को तैयार किया है। उन्होंने अपनी इस नई प्रजाति को कोरोना महामारी से जंग में मरीजों की जान बचाने में जुटे डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ को समर्पित किया है। उन्होंने इस प्रजाति का नाम ‘डॉक्टर आम’ रखा है। 

नॉक नॉक

कलीमुल्लाह खान ने ग्राफ्टिन तकनीकों के इस्तेमाल से 200 साल पुरानी विरासत को संरक्षित किया है। इस पहल के ध्वजवाहक (flag carrier) होने के कारण उन्हें 2008 में ‘पद्म श्री’ (Padma Shri) से सम्मानित किया गया और वे देश भर में ‘मैंगो मैन’ के नाम से प्रसिद्द हैं। उनका आम का बाग पांच एकड़ में फैला है और यहां पर वह विभिन्न प्रजातियों के आम का उत्पादन करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने उनको उद्यान पंडित की उपाधि से भी नवाजा है। 1957 से आम की खेती कर रहे खान ने आम की इन किस्मों की खूबसूरती में कोरोना योद्धाओं को अमर कर दिया जिनका बलिदान हमेशा जिंदा रहेगा और आम के हर टुकड़े के साथ हमे, आने वाली हर पीढ़ी और गर्मी में उनकी याद दिलाएगा !

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