लखनऊ के कुछ सड़क मार्ग ऐसे है जो बेहद ही खतरनाक है। आये दिन इन मार्गों पर सड़क हादसे और वाहनों के बीच टक्कर होती रहती है। अगर आप इन मार्गों पर ध्यान से नहीं चले तो आप कभी भी सड़क हादसे का शिकार हो सकते हैं। विभूति खंड में शहीद पथ की सड़क हो, या फिर फैज़ाबाद रोड के पास हाई कोर्ट के सामने की सड़क, इन मार्गों पर बेतरबीत कट बनने से हादसे का खतरा हमेशा रहता है। हाल ही में इन सड़कों के संबंधित तथ्य परिवहन विभाग के सर्वे में सामने आया है।

परिवहन विभाग ने अपने सर्वे में उन स्थानों को चिन्हित किया है जहां पिछले 1 साल के भीतर 30 से ज्यादा बार सड़क हादसे हुए हैं। सर्वे में 4 सड़कें PWD और 4 सड़कें NHI की मिली हैं। हुसड़िया चौराहे से जब ट्रैफिक शहीद पथ पर पहुँचता है तो समिट बिल्डिंग के सामने 4 जगह कट है। इसी कट से ट्रैफिक डाइवर्ट होने पर हादसे हो रहें हैं। लखनऊ से सुल्तानपुर रोड शहीद पथ अंडरपास से 1 किलोमीटर दूरी पर टी जंक्शन है। इसी रोड पर सामने डिवाइडर कट होने से वाहनों की टक्कर हो रही है हादसे हो रहे हैं। 

परिवहन विभाग रोड सेफ्टी के विशेष कार्याधिकारी प्रताप सिंह ने बताया कि 30 से अधिक बार वाले दुर्घटना स्थल का सर्वे किया गया है। हादसे रोकने के लिए PWD और NHI को दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र का बोर्ड, रम्बल स्ट्रिप, रम्बल स्ट्रिप साइन, डिवाइडर का कट बंद करने और 100 मीटर की दूरी पर यूटर्न या अंडर पास बनाने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही स्ट्रीट लाइट लगाने के निर्देश भी दिया गया है।

ये हैं लखनऊ के सबसे खतरनाक मार्ग 

विभूति खंड के शहीद पथ पर समिट बिल्डिंग।

लखनऊ गोसाईगंज रोड के अहिमामऊ के पास।

आगरा एक्सप्रेस वे के आसपास पारा के इलाके में।

मोहनलालगंज के देवा से सिसेंडी रोड के पास।

नेशनल हाईवे 56 अहिमामऊ रोड के आसपास।

फैजाबाद रोड विभूति खंड हाई कोर्ट के सामने।

नेशनल हाईवे मोहनलालगंज के हरिकिशन गढ़ी।

कानपुर रोड सरोजनीनगर स्कूटर इंडिया चौराहा।

चिनहट इलाके में राजमार्ग 25 के कमता चौराहे से मटियारी चौराहे तक।

आपको बता दें कि इन सभी मार्गों पर पिछले 1 साल में 496 हादसे हुए। 200 से ज्यादा लोग घायल हुए इन मार्गो पर। वहीं, बीते 1 साल में इन सड़क मार्गो पर 78 लोगों की जान जा चुकी है। 

हादसे के मुख्य कारण

उलटी दिशा में वाहन चलाना।

किस दिशा में जाना-आना है इसकी जानकारी न होना।

रात में स्ट्रीट लाइट का न जलना।

अधिक स्पीड में वाहन चलाना।

दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र पर अलग से बोर्ड लगाकर चेतावनी अलर्ट न देना। 

खराब टूटी सड़कें।

गलत संकेत लगना।

यातायात संकेतों के बारे में जागरूकता न होना।

प्रमुख राजमार्गों व सड़क पैदल पार करना।

ड्राइवर की असावधानी।

तेज व अनियंत्रित गति।

यातायात नियमों का जानबूझकर उल्लंघन।

उल्टी दिशा में वाहन चलाना।

ट्रैफिक व सिविल पुलिस की शिथिलता।

नशे में ड्राइविंग, मार्ग प्रकाश व्यवस्था न होना।

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