उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर खुर्रमनगर के पास शिवपुरी कॉलोनी में स्थित कुकरैल पिकनिक स्पॉट मगरमच्छ और घड़ियाल के लिये प्रसिद्ध है। इसके साथ ही लोग यहां दोस्तों परिवार के साथ पिकनिक मानने, खाली समय बिताने आते हैं। यहां तरह तरह के झूले है जो बच्चो को आकर्षित करते हैं और हरे-भरे घास के मैदान लोग सकून के पल बिताने के लिए शान्त वातावरण का मजा लेने के लिए यहां अक्सर आते है।

दर्शकों के लिए बंद किया गया कुकरैल पिकनिक स्पॉट

लेकिन अब दशकों पुराना बना कुकरैल पिकनिक स्पॉट दर्शकों के लिए हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। कोरोना काल में पिकनिक स्पॉट बंद होने के बीच दर्शकों पर भी पूर्णयता प्रतिबंध लगाने पर फैसला लिया गया है। अब यहां पर रिर्सच सेंटर और लायन सफारी बनाने की योजना है। क्योंकि कुकरैल प्रज्जन केंद्र देश का पहला सफल केंद्र माना गया है। जहां घड़ियाल और कछुआ के अंडे लाकर बच्चे पैदा किए जाते हैं। इन्हें तीन साल तक पालने के बाद नदियों में सफाई के लिए छोड़ दिया जाता है। जानकारी के अनुसार घड़ियाल उत्तर प्रदेश में गंगा नदी , घाघरा नदी और चम्बल नदी में पाए जाते है यह एक लुप्तप्राय प्राणी है सन 1970 में घड़ियालो की संख्या मात्र 300 थी इसीलिये सन 1975 में गिरवा नदी (को की कर्तनिया घाट में है ) से अंडे लाकर कुकरैल में घड़ियाल प्रजनन एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया जो की एक सराहनीय कदम था।

कुकरैल लखनऊ का एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट है। शिवपुरी कॉलोनी में बने गेट से अंदर जाने पर आपको दो रास्ते दिखाई देंगे, एक कुकरैल फेज 1, दूसरा कुकरैल फेज 2, करीब 10 एकड़ में फैले कुकरैल संरक्षित क्षेत्र की स्थापना 1978 में हुई थी। जहां शुरूआत में सिर्फ घड़ियाल प्रज्जन केंद्र था। 1989 में पिकनिक फिल्म आने के बाद कुकरैल पिकनिक स्पॉट नाम रखकर दर्शकों के लिए खोल दिया गया। जहां रोजाना 400 से 500 व किसी पर्व या त्योहार पर डेढ़ हजार लोग पहुंचते थे। यहां बच्चों के खेलने के सामान, झूला व जानवरों की मूर्ति लगाई गई है। इस क्षेत्र को शहर का सबसे शांत जगह माना जाता है। जहां समूचे लखनऊ व आसपास जिले के लोग आते थे। अंतिम बार होली के मौके पर 31 मार्च 2021 को 487 दर्शक आए थे। इसके बाद हमेशा के लिए दर्शकों के आने पर रोक लगा दिया गया। 

कुकरैल पिकनिक स्पॉट बनेगा लायन सफारी

कुकरैल पिकनिक स्पॉट दर्शकों के लिए हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है। अब यहां पर रिसर्च सेंटर और लायन सफारी बनाने की योजना है। अब इसे रिसर्च सेंटर बनाने की तरफ कदम उठाया गया है। डीएफओ रवि कुमार सिंह का कहना है कि कुकरैल पिकनिक स्पॉट को इटावा की लायन सफारी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। जिसका डीपीआर बन गया है। इसके लिए शासन से 200 करोड़ रुपए का बजट मांगा गया है। यहां 22 बाघ, 30 हिरन, 25 लेपर्ड और 15 भालू लाए जाएंगे।

यहां पर बायोडायवर्सिटी पार्क बनेगा जिसमें लुप्त हो रहे जीव जंतु और दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को रखा जाएगा। पार्क में 11 जगह पिकअप प्वाइंट बनाए जाएंगे। आने वाले दिनों में दर्शक बस के जरिए इस पार्क में घूम सकेंगे। कुकरेल संरक्षित वन क्षेत्र के उप मुख्य वन जीव प्रतिपालक अबु अरशद खान का कहना है कि कुकरैल वन क्षेत्र को नए सिरे से विकसित करने की तैयारी है। जहां वन्यजीवों पर शोध होगा। कोरोना वायरस को देखते हुए दर्शकों के आने पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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