लगातार दूसरे वर्ष कोरोना महामारी के दुष्प्रभावों के कारण व्यापारियों के लिए अपने व्यवसायों को इस कठिन समय बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। इसी सिलसिले में लखनऊ के व्यापरी राज्य प्रशासन से लॉकडाउन के प्रतिबंधों को हल्का करने का अनुरोध कर रहे हैं, जिससे कि दुकानों को खोला जा सके। इसके पहले 15 अप्रैल को महामारी की दूसरी लहर के चलते व्यापारियों ने अपनी इच्छा से दुकानें बंद कर दी थीं।

अब लॉकडाउन की अवधि 40 दिनों से अधिक बढ़ रही है 

हालांकि, यूपी में कोरोना के मामलों में धीरे धीरे गिरावट आ रही है लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर सरकार ने 31 मई तक का लॉकडाउन लगाया हुआ है। विशेष रूप से, लखनऊ में बाजार अप्रैल के मध्य से बंद हैं और उन्हें फिर से खुलने के पहले लगभग डेढ़ महीने का समय हो गया है। इतनी लम्बी अवधि तक बंद रहने के कारण लखनऊ में डीलरों और दुकानदारों को भारी नुकसान हुआ है और उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

जैसे की पिछले कुछ समय में ताज़ा मामलों में काफी गिरावट देखी गयी है, इसी के चलते काफी व्यापारियों ने बाज़ारों को खोलने का अनुरोध किया है। इस बारे में बात करते हुए हजरतगंज ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन चंद्र बंभानी ने कहा कि अब पाबंदियों में ढील दी जानी चाहिए ताकि रुके हुए कारोबार को फिर से शुरू किया जा सके। प्रमुख चिंताओं में से एक पैसे का बकाया होना, जो केवल तभी चुकाया जा सकता है जब आय का मार्ग फिर से शुरू हो जाए।

रुका हुए आय के स्रोत और घटती बचत

यूपी कपड़ा व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक मोतियानी ने कहा – “हमें सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ बाजारों को फिर से खोलने की अनुमति देनी चाहिए। कोरोना के मामले कम हो गए हैं और हम दुकानों को अधिक समय तक बंद रखने की अनुमति नहीं दे सकते।” इसके अलावा, एक अन्य व्यापारियों के नेता का मानना ​​है कि इस अवधि में उनकी आय का कोई स्रोत नहीं होने के कारण दुकानदार अपनी बचत पर लंबे समय तक जीवित रहे हैं। उन्हें लगता है कि रीटेल व्यापार को हर दिन एक निश्चित अवधि के लिए खुलने की अनुमति दी जानी चाहिए, इस बात पर गौर करते हुए कि पूरी तरह से बंद होने से व्यापारियों की आय पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। शहर के सभी व्यापारों के बीच फूल विक्रेताओं को लॉकडाउन के चलते भारी नुक्सान उठाना पड़ा है। जल्द राहत का कोई संकेत ना दिखते हुए अधिकांश छोटे पैमाने के डीलर अनिश्चितताओं के बीच अन्य काम करने के लिए मजबूर हो गए हैं।

Knock Knock

जब सामान्य स्थिति के लौटने के बाद स्थानीय बाजार फिर से खुलेंगी, तब हम सबको अपने संसाधनों के ज़रिये उनका समर्थन करना चाहिए। जब हम स्थानीय आर्थिक सिस्टम को मजबूत करेंगे, तभी भारतीय अर्थव्यवस्था विकास के एक स्थिर रास्ते पर लौट पाएगी। 

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