लखनऊ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा कई उपाय किये जा रहे हैं। इन्हीं उपायों में सबसे महत्वपूर्ण है राजधानी में बनने वाला ग्रीन कॉरिडोर। ग्रीन कॉरिडोर में वाहनों की आवाजाही का रोड नेटवर्क तो होगा ही इसके साथ साथ यहां एलडीए 11 नए कमर्शियल हब भी विकसित करेगा। एलडीए ने इसके लिए जमीन भी चिन्हित कर ली है। अब इसको डीपीआर का भाग बनाया जा रहा है, जिससे ग्रीन कॉरिडोर के साथ इन कमर्शियल हब का भी विकास कराया जा सके।

ग्रीन कॉरिडोर की तैयार फिजिबिलिटी रिपोर्ट में इन कमर्शियल हब को शामिल कर लिया गया है। अब आर्किटेक्ट सलाहकार टाटा कंसल्टेंट्स डीपीआर में इनके विकास के लिए आने वाले खर्च और इससे संभावित आय का आकलन कर रिपोर्ट देगी। एलडीए की योजना के मुताबिक ये 11 कमर्शियल हब आईआईएम रोड से किसान पथ के बीच दाएं और बाएं दोनों तट पर विकसित किए जाने हैं। इनमें से तीन किसान पथ से शहीद पथ के बीच दूसरे चरण में है, वहीं आठ कमर्शियल हब पहले चरण में हैं। इनमें से दो लोहिया पथ के पास प्राइम लोकेशन पर रखे गए हैं। कुल 45 एकड़ जमीन इन कमर्शियल हब के लिए चिन्हित की गई है। 

ग्रीन कॉरिडोर के रेवेन्यू मॉडल के मुताबिक आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों से करीब 10,800 करोड़ रुपये की आय प्रस्तावित है। इसमें से 2700 करोड़ रुपये की आवासीय और 8100 करोड़ रूपये की व्यावसायिक संपत्तियां होंगी। अधिकारीयों का कहना है कि यह आकलन ग्रीन कॉरिडोर के बनने के बाद दोनों तट पर मौजूद संपत्तियों के वैल्यूएशन में आने वाले बदलाव और बिक्री के आधार पर किया गया है। ग्रीन कॉरिडोर में 11 नए बाजार भी खरीदारी के लिए मिल जाएंगे। इसमें मौजूदा बाजारों में भीड़ भी कम होगी, इसके साथ ही लोगों को रोजगार के भी अवसर मिलेंगे। 

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