17 अप्रैल को केरल में जन्मी आईएएस अधिकारी रोशन जैकब ने लखनऊ की कार्यवाहक डीएम के रूप में सभी प्रशासनिक ज़िम्मेदारियों को संभाला। जब शहर कोरोना वायरस संक्रमण की घातक दूसरी से लहर से जूझ रहा था तब जैकब शहर में उम्मीद की किरण बनकर आयीं। लखनऊ में 2,37,858 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और इनमें से सबसे अधिक मामले अप्रैल और मई के महीने में दर्ज किये गए। 

शहर एक भयावह कोरोना संकट से जूझ रहा था, जब आईएस अधिकारी ने शहर को महामारी के चंगुल से छुड़ाने का कठिन काम किया था। अब, जैकब के अथक प्रयासों ने न केवल शहर को संक्रमण के भारी बोझ से राहत दिलाई है बल्कि राज्य के सीएम और अपने समकालीनों से खूब आदर प्राप्त किया है।

 महामारी और दहशत से निपटने का जैकब का कार्यकाल !

लगभग डेढ़ महीने की रणनीति और वायरस के लिए विभिन्न रोकथाम उपायों को लागू करने के बाद पिछले हफ्ते की शुरुआत में, रोशन जैकब ने माइनिंग विभाग के डायरेक्टर के रूप में अपने कर्तव्यों को फिर से शुरू करने के लिए डीएम के रूप में अपने शासनकाल को समाप्त कर दिया। लखनऊ में उनके कार्यकाल में कोरोना वायरस का ग्राफ बहुत तेज़ी से नीचे गया है। 17 अप्रैल को लगभग 6,000 मामले थे जो आज की तारीक में कम होकर 53 हो गए है।

दूसरी कोरोना लहर के दौरान निवासियों के साथ-साथ रोगियों की जरूरतों और मांगों में जो गैप हो रहा था, उन्होंने उसे पूरा करने के भरसक प्रयास किये। ज़रुरत के समय में जल्द से जल्द निर्णय लेकर उसपर अमल करके जैकब के अतुलनीय प्रदर्शन ने दूसरों के लिए अपने कार्य के प्रति समर्पण के मार्ग प्रशस्त किये है। रैपिड रिस्पांस टीमों का गठन, तीव्र कमी के बीच बिस्तर की उपलब्धता को सुनिश्चित करना, बिस्तर आवंटन को सुव्यवस्थित करना, एसिम्पटोमेटिक लोगों को चिकित्सा किट प्रदान करना, मेडिकल टेलीकंसल्टेशन सेवाओं को बढ़ाना, उनके द्वारा किये गए कई उद्यमों में से कुछ हैं।

अनिश्चित परिस्थिति में भी निडर होकर जैकब अस्पतालों में लाइव बेड की स्थिति की जांच करने के लिए जाती रहीं और यह रोशन की वजह से है, कि सभी प्राइवेट अस्पताल अब मरीजों से पहले के विपरीत उचित शुल्क ले रहे हैं। अधिकारी ने प्राइवेट अस्पतालों में दाखिले के लिए सीएमओ से एक पत्र तैयार करने के अनिवार्य नियम को भी खत्म कर दिया, जिसके कारण कई लोगों ने प्रवेश की प्रतीक्षा करते हुए कोरोना ​​के कारण दम तोड़ दिया।

रोशन जैकब के महामारी के दौरान किये गए सराहनीय प्रदर्शन में उन्होंने जिस प्रकार जिले में एलएमओ संकट को संभाला वह काबिलेतारीफ है। गृह विभाग के सहयोग से रोशन ने नियमित रूप से ऑक्सीजन टैंकरों की निगरानी की और अस्पतालों द्वारा ऑक्सीजन की बर्बादी पर भी नज़र रखी और रिपोर्ट के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए गए।

रोशन का कार्यकाल भी उनके नाम के अनुरूप है 

जैकब रोशन की पहली प्रशासनिक भूमिका झांसी में एक प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी की थी, और अपने 17 साल के लंबे करियर में उन्होंने बुलंदशहर, बस्ती, गोंडा, कानपुर और रायबरेली के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में, रोशन जैकब यूपी के विशेष सचिव और जियोलॉजी और माइनिंग की डायरेक्टर हैं, और यह पद संभालने वाली वे राज्य की पहली महिला हैं। पिछले साल उनके मार्गदर्शन में, यूपी देश में लॉकडाउन के बीच खनन गतिविधियों को शुरू करने वाला पहला क्षेत्र बन गया था।

महामारी प्रबंधन के संबंध में उनके प्रयासों को देखते हुए, यूपी के प्रधान सचिव द्वारा कोरोना प्रबंधन के ओआईसी के रूप में जैकब का कार्य जारी रखने का एक आदेश दायर किया गया था। यह आदेश तब दायर किया गया जब लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश अपने कर्तव्यों को फिर से शुरू कर चुके थे। यह जैकब के प्रोफ़ेशनल समर्पण और शहर की प्रबंधन प्रणाली पर उनके प्रभाव के साथ-साथ उनके बेजोड़ नेतृत्व के गुणों को दर्शाता है।

सच है, विपत्ति जब आती है,

कायर को ही दहलाती है,

सूरमा नही विचलित होते,

क्षण एक नहीं धीरज खोते,

इन पंक्तियों की वास्तविकता को हम भली भाँती रोशन जैकब के कार्यों में देख सकते हैं। दृढ़ संकल्प और हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत, रोशन जैकब जैसे आदर्श अधिकारी आधुनिक भारत की अमूल्य घरोहर हैं जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

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