हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने कुश्‍ती समेत दो खेलों को गोद लेने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा की कि राज्य सरकार कुश्ती समेत दो खेलों को गोद लेकर अगले 10 साल तक उनका वित्तपोषण करेगी। और अब सरकार ने लखनऊ और नोएडा में इंटरनेशनल स्तर की कुश्ती अकादमी बनाने का फैसला लिया है। इस कुश्ती अकादमी में उत्तर प्रदेश के पहलवान समेत देश और विदेश के पहलवान भी इंटरनेशनल सुविधाओं से लैस कुश्ती अकादमी में ट्रेनिंग करेंगे। इन अकादमियों में पहलवानो को उनकी ट्रेनिंग से संबंधित हर सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।

देश विदेश के पहलवान भी कर सकेंगे ट्रेनिंग

राज्य स्तर पर कुश्ती अकादमी राजधानी लखनऊ अवध विहार में 2 एकड़ जमीन पर खुलेगी। वहीं इंटरनेशनल स्तर का कुश्ती सेंटर नोएडा में खोलने पर विचार किया जा रहा है। भारतीय कुश्ती महासंघ ने सरकार से हाथ मिलाकर इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। नोएडा में भी इंटरनेशनल स्तर का ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा और इसके लिए सरकार से बातचीत हो रही है। इस सेंटर में ट्रेनिंग की इंटरनेशनल स्तर की सुविधाएं होंगी। अच्छे देशी और विदेशी ट्रेनर होंगे। जिस तरह भारतीय पहलवान विदेश में ट्रेनिंग करने जाते हैं ठीक उसी तरह विदेशी पहलवान यहां ट्रेनिंग करने आएंगे।

ट्रेनिंग सेंटर में मिलेगी इंटरनेशनल लेवल की सुविधा 

कुश्ती अकादमी पूरी तरह इंडोर होगीइ और समें 4 मैट्स लगाई जाएंगी। इसके अलावा पहलवानो के रहने के लिए कुछ कमरे होंगे। हॉल में प्रतियोगिताएं होंगी और दर्शकों के बैठने की जगह भी होगी। अत्याधुनिक मशीनो वाला जिम्नेजियम होगा। सोनाबाथ, स्टीम बात आदि की सुविधा होगी और मसाज सेंटर भी होगा। इसके साथ ही भोजन के लिए बढ़िया मेस भी होगी। खेल विभाग के अधिकारी और कुश्ती संघ के पदाधिकारी बैठकर अकादमी की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे।

कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बोले यूपी कुश्ती का सबसे बड़ा हब बनेगा 

भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष, बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि दोनों अकादमियों लखनऊ और नोएडा में खुल जाने के बाद उत्तर प्रदेश कुश्ती का देश में सबसे बड़ा हब बनेगा। राज्य के पहलवान प्प्रोफेशनल होंगे। लखनऊ में अकादमी खुलने से नेशनल कैंपों में हिस्सा लेने वाले पहलवानो को भी फायदा होगा। कैंप खत्म होने पर वे इस अकादमी में रहकर ट्रेनिंग कर सकेंगे। ब्रिजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कुश्ती खेल को गोद लेने वाली उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पहलवानों के समर्थन और बुनियादी ढांचों के लिए 2032 ओलंपिक तक 170 करोड़ रुपये का निवेश किए जाने की उम्मीद है। डब्ल्यूएफआई के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि उन्होंने ओडिशा सरकार के हॉकी खेल के समर्थन देने के कदम से प्रेरणा लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से अपने खेल के लिए इसी तरह की मदद की गुजारिश की।

ब्रिजभूषण शरण सिंह ने कहा, ‘ओडिशा छोटा राज्य है, फिर भी वह इतने शानदार तरीके से हॉकी का समर्थन कर रहा है तो हमने सोचा कि उत्तर प्रदेश कुश्ती का समर्थन क्यों नहीं कर सकता जबकि यह इतना बड़ा राज्य है। हमने उनसे संपर्क किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वीकार कर लिया। हमने अपने प्रस्ताव में 2024 खेलों तक प्रत्येक वर्ष समर्थन के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग की (मतलब 30 करोड़ रुपये) और फिर 2028 के अगले ओलंपिक चक्र के लिए प्रत्येक वर्ष 15 करोड़ रुपये (60 करोड़ रुपये) की मदद के लिए कहा है और अंतिम चरण में 2032 के लिए प्रत्येक वर्ष 20 करोड़ रुपये (80 करोड़ रुपये) के लिए कहा।’

हाल ही में टोक्यो ओलंपिक 2020 में इस बार रवि कुमार दहिया और बजरंग पूनिया ने कुश्ती में भारत का नाम रोशन करने में कामयाबी हासिल की है। पिछले 4 ओलंपिक से कुश्ती में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन कमाल का रहा है। भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया (65 किग्रा भार वर्ग) ने कजाकस्तान के पहलवान नियाजबेकोव दौलत को 8-0 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया। वहीं रवि दहिया ने रजत पदक जीतकर पहलवानी में मेडल लाने के सिलसिले को बरकार रखा। भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन देखते हुए अब उत्तर प्रदेश सरकार ने कुश्ती में निवेश करने का फैसला किया है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *