स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ में 1 जुलाई से इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने जा रहा है। इस अत्याधुनिक सिस्टम से शहर के 132 प्रमुख चौराहों को न सिर्फ यातायात संचालित होगा, बल्कि सीसीटीवी कैमरे खुद ही ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों की फोटो क्लिक कर लेंगे। इसके बाद एनआईसी (NIC) से जुड़ा इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का सर्वर इसी फोटो के वाहन नंबर के आधार पर उसके मालिक के मोबाइल पर तुरंत मैसेज के जरिये चालान भेज देगा। इसमें वाहन चालक का यातयात नियम तोड़ने का फोटो समय और स्थान दर्ज होगा। 

चौराहों पर रेड सिग्नल क्रॉस करने पर, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट, ओवर स्पीड, उलटी दिशा में गाड़ी लेकर जाने पर, नंबर प्लेट गड़बड़ होने पर अब ई-चालान तुरंत होगा। इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से चालान होने पर शमन शुल्क जमा करने के लिए संबंधित वाहन चालक को कहीं जाना नहीं पड़ेगा। चालान का मैसेज सीधा मोबाइल पर भेज दिया जाएगा और मैसेज में ही शमन शुल्क जमा करने का लिंक ऑप्शन भी दिया जाएगा। डीसीपी ट्रैफिक के कार्यालय में भी शमन शुल्क जमा किया जा सकता है।

राजधानी में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट शुरू होने पर ट्रैफिक को भी स्मार्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लालबाग़ स्थित स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मुख्यालय में ही इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का कंट्रोल रूम बनाया गया हैं। इससे 132 प्रमुख चौराहों को अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, ट्रैफिक सिग्नल और इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ा गया। इसी कंट्रोल रूम के जरिये निगरानी करते हुए यातायात संचालन और ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को अनाउंसमेंट कर चेतावनी देने तक की भी व्यवस्था है। ट्रैफिक सिग्नल भी कंट्रोल रूम से संचालित किए जा रहे हैं।

इससे पहले एनआईसी (NIC) से देशभर के वाहनों का डाटा नहीं मिल पाने से वाहनों का ई-चालान शुरू नहीं हो सका था। पिछले दिनों इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का कंट्रोल रूम एनआईसी (NIC) से जुड़ने पर इसकी कार्रवाई शुरू करने को शासन से अनुमति मांगी गई थी जिसकी मंजूरी दे दी है। अब 1 जुलाई से शहर के 132 चौराहों पर ई-चालान शुरू हो जाएंगे।

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