प्रकृति का एहसास लेने के लिए हम सभी प्राकृतिक जंगलों, वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी या फिर पहाड़ों पर जाते है। प्रकृति के करीब जाकर हम सभी को एक अलग रोमांच सा एहसास होता है सुकून मिलता है, जिससे हम तरोताजा महसूस करते हैं। लेकिन अब जल्द ही आपको पहाड़ और जंगल जैसा एहसास आपको अपने लखनऊ शहर में मिल सकेगा। लखनऊ के कुकरैल वन्य क्षेत्र में जल्द ही आरोग्य वाटिका पार्क बनने जा रहा है जो आपको सेहतमंद बनाएगा और एक रोमांच का एहसास देगा। कुकरैल वन्य क्षेत्र में प्रस्तावित जैव विविधता पार्क का निर्माण किया जाएगा। इस आरोग्य वाटिका पार्क में रोमांचक पर्यटन, नेचर ट्रेल और कैनोपी वॉकवे जैसे कई आकर्षण जोड़े गए हैं।

प्रमुख सचिव वन, मनोज सिंह का कहना है कि पार्क की अनुमानित लागत 525 करोड़ रुपये है। इसके नए डिज़ाइन का प्रेसेंटेशन उनके सामने हो चूका है। अब आगे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है। वर्ष 2018 में जब प्लान तैयार हुआ तो उसमें तितली पार्क सबसे चर्चित रहा। इसे तितली के आकार में ढालने की परिकल्पना की गई है। नए प्लान में भी इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। पुराने ड्राफ्ट में स्मृति वन, बांस-ताड़ और वनस्पति वाटिका समेत कुछ और आकर्षण भी थे।

फिटनेस के भी होंगे सभी इंतजाम, कैंपिंग एरिया में बिता सकेंगे समय

शहर की भागदौड़ से दिल ऊबने पर कुछ समय प्रकृति का साथ दिलाने के लिए यहां खास कैंपिंग एरिया होगा। यहां आप कैंप या रूरल हट में कुछ दिन बिता सकेंगे। यह ग्रामीण और पहाड़ों वाला अहसास करएगा।लोगों को प्रकृति के करीब ले जाने और उससे जुड़े अहसास को महसूस करवाने के लिए यह पार्क पूरी तरह हरियाली और पेड़ो से भरा होगा। इसके साथ ही यहां लोगों के स्वस्थ्य को और बेहतर करने के लिए पार्क में फिटनेस के सभी इंतजाम होंगे। इस पर करीब 33. 29 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यहां लोग  योग के साथ साथ एक्सरसाइज भी कर सकेंगे।

इसके साथ ही प्राकृति को करीब से समझने के लिए नेचर ट्रेल विकसित करने की भी योजना है। इसमें पगडंडियों को पेड़ों के किनारे ऐसे निकाला जाएगा कि यहां की हरियाली का नुकसान न हो। पेड़ों के पास बैठने की भी व्यवस्था होगी। एक पगडंडी कुकरैल नदी से होकर भी गुजरेगी। इसके लिए पानी को साफ़ किया जाएगा। पार्क में कैनोपी वॉक-वे भी होगा। वहीँ, पहाड़ों की शक्ल देकर चट्टानों पर रस्सियों के सहारे चढ़ना जैसे रोमांचक खेल शामिल होंगे।

यहां देश के कोने-कोने से कुछ खास पेड़ प्रतीकात्मक तौर पर लागए जाएंगे। केरल की ग्रीनरी, अंदर प्रदेश का लाल चन्दन, उत्तराखंड के ताड़ और देवदार और अन्य पेड़ भी होंगे। इसके साथ ही यहां जंगल जैसा एहसास दिलाने के लिए इसे पूरी तरह जंगल जैसा बनाया जाएगा। 

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