मुख्य बिंदु

लखनऊ के बैंकर ने माउंट कुन को किया फतह, माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का लक्ष्य।

बैंकर अमित कुमार ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यह उपलब्धि हासिल की।

अमित कुमार बिहार के छपरा जिले के मूल निवासी है।

साल 2017 में रूपकुंड ट्रैक (Roopkund Trek) पर ऊंची चोटियों को देखकर चढ़ने का फैसला किया था।

अब माउंट एवेरेस्ट पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य उन्होंने रखा है।

लखनऊ के इंदिरानगर में रहने वाले 36 साल के बैंक कर्मी अमित कुमार ने 13 अगस्त को 7077 मीटर ऊंचे माऊंट कुन (Mount Kun) पर तिरंगा फहराकर लखनऊ का पूरे देश में मान बढ़ाया। अपने इस अभियान से पहले अमित कुमार कोरोना संक्रमण का भी शिकार हुए थे लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अब उनका अगला लक्ष्य है कि वो माउंट एवेरेस्ट (Mount Everest) पर भारत का तिरंगा फहराना चाहते है। बिहार के छपरा जिले के मूल निवासी, अमित ने कहा कि शुरू में, हमने स्वतंत्रता दिवस को चिह्न्ति करने के लिए 15 अगस्त को माउंट कुन चोटी पर तिरंगा फहराने की योजना बनाई थी। लेकिन, अत्यधिक ठंड के मौसम और 20,000 फीट से अधिक अप्रत्याशित जलवायु परिस्थितियों ने हमें अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर किया।

अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट को फतह करना है

 अमित ने बताया कि 14 अप्रैल को वो कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे, लेकिन अपने जूनून और पहाड़ों के प्रति दीवानगी उनका हौसला कायम रखा। बीमारी से निजात पाने के बाद उन्होंने फिर से अभ्यास शुरू किया और लद्दाख की कठिन खतरनाक पहाड़ी माउंट कुन पर चढ़ने के लिए खुद को तैयार किया। अमित ने बताया कि 2017 में रूपकुंड ट्रैक (Roopkund Trek) पर ऊंची चोटियों को देखकर चढ़ने का फैसला किया था। हालांकि ऐसा करना उनके लिए इतना आसान नहीं था। अमित बताते है कि एक टाइम था जब उनका वजन 115 किलो था, ऐसे में चढाई के लिए खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया। अब माउंट एवेरेस्ट पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य उन्होंने रखा है।

पहाड़ चढ़ने के लिए नहीं ली कोई ट्रेनिंग 

अमित ने पहाड़ चढ़ने के लिए कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है। साल 2019 में ट्रेनिंग के लिए दार्जिलिंग में हिमालयन मॉउंटिंग इंस्टिट्यूट (Himalayan Mountaineering Institute) गए थे, लेकिन पिता के निधन के कारण उनको अपनी ट्रेनिंग को बीच में ही छोड़कर वापस लौटना पड़ा। अमित ने बताया कि 3 अगस्त को माउंट कुन पर चढ़ाई के शुरुआत की थी, आखिरी चढ़ाई के दौरान रात करीब 11 बजे हेड लैंप ने काम करना बंद कर दिया था। अंधेरे में कुछ भी देखना संभव नहीं था, तेज हवा चल रही थी और उसके कारण दाहिने हाथ का दस्ताना भी गिर गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ते रहे। 13 अगस्त को माउंट कुन पर तिरंगा फहराकर सपने को पूरा किया। अमित के साथ उनकी टीम में कोलकाता के मेजर चिराग मुख़र्जी, हैदराबाद के भरत, गुजरात के पलकेश कलमा और हिमाचल प्रदेश की बलजीत कौर शामिल थी।

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