लखनऊ में कोरोना वायरस नियंत्रित होता दिख रहा है। टेस्ट, क्वारंटीन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के फॉर्मूला से स्वास्थ्य विभाग ने यह कामयाबी हासिल की। बीते सोमवार को शहर में एक भी संक्रमित नहीं मिला। वहीं पिछले 10 दिनों से शहर में सिंगल डिजिट में ही केस आ रहे हैं। विभाग की ओर से हर दिन शहर में 20,000 से अधिक लोगों की कोरोना जांच की जा रही थी। इसी का नतीजा है कि संक्रमण को फैलने से रोका जा सका। लखनऊ में कोरोना का पहला मरीज पिछले साल 11 मार्च 2020 को पाया गया था। उसके बाद दूसरी लहर में 16 अप्रैल को 6598 सर्वाधिक मरीज मिले थे। अब 10 जुलाई से 10 अगस्त तक लगातार सिंगल डिजिट में कोरोना के मरीज पाए गए।

सीएमओ मनोज अग्रवाल ने बताया कि अगस्त में जब कोरोना के केस में इजाफा हुआ तो संक्रमित के संपर्क में आने वालों की टेस्टिंग की संख्या दोगुनी कर दी गई। पहले हर संक्रमित के संपर्क में आने या आसपास के न्यूनतम 25 लोगों के सैंपल लिए जाते थे, जिसे 50 कर दिया गया। वहीं शहर के जितने भी एंट्री पॉइंट है, वहां गहनता से जांच की जा रही है। रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड तक दूसरे राज्यों से आने वालों के टेस्ट किए जा रहे हैं। इससे कोई संक्रमित लखनऊ आया भी तो उसे समय रहते ही क्वारंटीन कर दिया गया। फिर चाहे वो नागपुर से आया यात्री हो जो रेलवे स्टेशन पर संक्रमित मिला या केरल से आई पीजीआई की नर्स। सभी को समय रहते क्वारंटीन कर उनके संपर्क में आए सभी की टेस्टिंग की गई, जिससे दूसरों में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

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