लखनऊ में केजीएमयू के डॉक्टरों ने एक बार फिर मेडिकल के क्षेत्र में कमाल कर दिया है। केजीएमयू के 12 डॉक्टरों की टीम ने एक महीने से वेंटीलेटर पर भर्ती गर्भवती महिला की जान बचाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। गर्भवती महिला के गुर्दे फेल हो चुके थे, सांस लेने में भी काफी तकलीफ थी और फेफड़े भी ठीक से काम नहीं का रहे थे। इसके बावज़ूद डॉक्टरों की टीम ने सामान्य प्रसव कराकर महिला को नई जिंदगी का तोहफा दिया। लेकिन अफसोसजनक बात यह है कि गर्भवती महिला के पेट में शिशु पहले ही दम तोड़ चूका था उसे बचाया नहीं जा सका। केजीएमयू का दावा है कि डायलिसिस पर रहते हुए गर्भवती का सामान्य प्रसव कराने का प्रदेश में इस तरह का पहला मामला है। 

फर्रुखाबाद निवासी 23 साल की गर्भवती महिला निधि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीनमेरी) में गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था। गर्भवती महिला को सांस लेने में दिक्कत थी, इमरजेंसी में डॉक्टरों ने जांच कराई तो पता चला महिला के गुर्दे फेल हो चुके है और फेफड़े भी ठीक से काम नहीं कर रहे। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ.सुधीर सिंह के मुताबिक गर्भवती के शरीर में एसिड का निर्माण अधिक हो रहा था। चिकित्सा विज्ञानं में इसे मेटाबॉलिक एसिडोसिस (Metabolic acidosis) कहते हैं। इन सभी दिक्कतों के कारण गर्भवती का शिशु पेट में ही दम तोड़ चूका था। इलाज के बावजूद गर्भवती की तबियत लगातार बिगड़ती गई। आखिर में डॉक्टरों ने महिला को वेंटीलेटर और वैसोप्रेसर सपोर्ट पर रखा। गुर्दे फेल होने से मरीज की लगातार डायलिसिस की जा रही थी। इस दौरान ही डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव कराने का फैसला लिया। 

सामान्य प्रसव के बाद महिला की तबियत में हुआ सुधार 

क्वीनमेरी की प्रवक्ता डॉ. रेखा सचान ने मीडिया को बताया कि प्रसव के बाद गर्भवती की तबियत में सुधार शुरू हुआ। धीरे धीरे गुर्दों ने भी काम करना शुरू कर दिया और फेफड़ों की सेहत में भी सुधार हुआ। करीब एक महीने के बाद वेंटीलेटर हटाकर सामान्य वार्ड में भर्ती किया गया। उन्होंने बताया कि तबियत में सुधार के बाद महिला को छुट्टी दे दी गई। 

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