राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) के प्रावधान को लागू करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय ने चार वर्षीय ग्रेजुएट कोर्स के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया है। मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट ने महामारी से संबंधित कांसेप्ट भी शामिल किये है। जहां ऐसे नए पाठ्क्रमों के शामिल होंने से छात्रों को महामारी की परिस्थितियों को विस्तार से समझने में मदद मिलेगी, वहीं ये विद्यार्थियों को आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए एक दृष्टिकोण भी प्रदान करेंगे।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अवधारणाओं को पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा

जबकि विभिन्न बोर्ड ऑफ स्टडीज और फैकल्टी बोर्ड द्वारा पाठ्यक्रम को मंजूरी दी गई है, 17 जुलाई को बैठक में अकादमिक परिषद द्वारा इसे मंजूरी देने के बाद अंतिम निर्णय  लिया जाएगा। मनोविज्ञान कोऑर्डिनेटर अर्चना शुक्ला ने कहा, “हमारे चार साल के यूजी पाठ्यक्रम छात्रों को हर कदम पर रोजगार प्रदान पर ध्यान केंद्रित करते हैं, इसलिए, ऐसी अवधारणाओं को शामिल किया गया है जो समय की जरूरत हैं।”

उन्होंने आगे पुष्टि की कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को पहली बार शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, शिक्षकों और छात्रों दोनों को इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में रिसर्च और अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। महामारी के बढ़ते समय के साथ, छात्रों के बीच तनाव और चिंता का स्तर बढ़ गया है और विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे सामने आए हैं। इससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक यात्राएं प्रदान करने और रोजगार क्षमता बढ़ाने की दृष्टि से इस समस्या का समाधान करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

छात्रों को हेल्थकेयर सिस्टम के मुद्दों से परिचित कराया जाएगा

यह भी कहा गया है कि सोशल वर्क विभाग के छात्रों को हेल्थकेयर सिस्टम की चुनौतियों से परिचित कराएगा, जिसमें चल रही महामारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अनूप कुमार भारतीय ने कहा, “पाठ्यक्रम को रोज़गार के अनुकूल  बनाने के लिए हमने अपने नए यूजी पाठ्यक्रम में फील्डवर्क पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है। एक अवधारणा को सीखने के लिए, एक छात्र को लोगों के बीच जाकर चुनौतियों का पता लगाना होगा।” 

उन्होंने बताया कि छात्रों को लोगों, संस्थानों और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के बारे में पढ़ाया जाएगा। यह वर्तमान महामारी के बीच नागरिकों की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए चिकित्सा सेवाओं और सुविधाओं के बेहतर उपयोग में सहायता करेगा। इसके अतिरिक्त, राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रमों में भी बदलाव किया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में विकल्प और उसके अपेक्षित परिवर्तनों को शामिल किया जा सके।

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