लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने महामारी के बीच अपनी पहली लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की। 43 वर्षीय मरीज ने यहां ऑपरेशन के बाद ठीक होने का एक महीना पूरा किया और मंगलवार को उसे छुट्टी दे दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 30-40 लाख के बीच की लागत वाली सर्जरी लगभग मुफ्त प्रदान की गई थी और एक गंभीर माहमारी के संकट के समय की गई थी।

केजीएमयू ने खोली नई उपलब्धि


पिछले महीने, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद से अपना पहला लीवर ट्रांसप्लांट सर्जन किया। सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रमुख प्रोफेसर अभिजीत चंद्रा ने कहा, "सीमित संसाधनों में प्रत्यारोपण करना एक चुनौती थी। पांच और मरीज कतार में इंतजार कर रहे हैं और अगला ट्रांसप्लांट अगले 15 दिनों में किया जाएगा।"

जबकि इस प्रक्रिया में कई झटके थे क्यूंकि प्राथमिक रूप से संसाधनों की कमी थी और रोगी के आर्थिक रूप से कमज़ोर होने ने काफी परेशानियों को बढ़ा दिया। लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी एक महंगा इलाज है जो आमतौर पर एक निजी अस्पताल में लगभग ₹40 लाख के आसपास होता है। रोगी, एक सामान्य दुकानदार होने के नाते इस भारी राशि को वहन करने में असमर्थ था, लेकिन अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि यह उसकी सर्जरी में बाधा के रूप में कार्य न करे। ट्रांसप्लांट को यूपी सरकार की असाध्य रोग योजना के तहत आर्थिक समर्थन दिया गया था। इसके लिए अवध इंटरनेशनल फाउंडेशन से ₹4 लाख की अतिरिक्त राशि प्राप्त हुई।

प्रोफेसर चंद्रा ने बताया कि मरीज उन्नत लीवर सिरोसिस से पीड़ित था और उसे गंभीर पीलिया और खून बह रहा था। उनकी पत्नी ने अपने लीवर का एक हिस्सा दान कर दिया और सर्जरी के एक हफ्ते के भीतर उन्हें छुट्टी दे दी गई। ट्रांसप्लांट के बाद, रोगी को ठीक होने के लिए वापस रखा गया था और कुछ दिनों तक उसके शरीर से प्रतिदिन लगभग चार से छह लीटर तरल पदार्थ निकाला जाता था, जब तक कि लीवर अपना सामान्य आकार नहीं ले लेता।

केजीएमयू की 100-डॉक्टर ट्रांसप्लांट टीम के बारे में

अस्पताल के प्रवक्ता डॉ सुधीर सिंह ने कहा कि केजीएमयू ने अब तक लगभग 11 ट्रांसप्लांट सर्जरी की हैं, जिनमें 90% सफल रही है। संयोग से, यह उत्तर प्रदेश का एकमात्र चिकित्सा संस्थान है जिसने बहु-अंग दान किया है। केजीएमयू ने जरूरतमंद मरीजों के लिए उत्तर भारत के अन्य संस्थानों को भी 50 शवों के अंग उपलब्ध कराए हैं।

संस्थान में एक नामित ट्रांसप्लांट टीम है, जिसमें सौ से अधिक डॉक्टर और कर्मचारी शामिल हैं, जिसका नेतृत्व कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) बिपिन पुरी कर रहे हैं। लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी करने वाले प्रोफेसर चंद्रा और प्रोफेसर विवेक गुप्ता सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम के हैं।