लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) द्वारा हाल ही में की गयी एक स्टडी में यह स्पष्ट हो गया है कि टीकाकरण के बाद विकसित एंटीबॉडी, संक्रमण के बाद बनने वाले एंटीबॉडी की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं। केजीएमयू के 989 स्वास्थ्य कर्मियों और लगभग 500 प्लाज्मा सैंपल पर किए गए एक एंटीबॉडी टेस्ट के माध्यम से यह पाया गया कि टीकाकरण से बनने वाली एंटीबॉडी अधिक शक्तिशाली और लंबे समय तक चलती हैं। दूसरी ओर, जो वायरस के संपर्क में आने के बाद उत्पन्न हुए, वे चार महीने के भीतर गायब हो गए।

पूर्व संक्रमण वाले 50% प्लाज्मा दाताओं के पास पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं थे


अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला है कि बड़े पैमाने पर टीकाकरण हर्ड इम्युनिटी की ओर ले जाता है, और बड़ी मात्रा में लोगों के संक्रमित होने के माध्यम से इसे प्राप्त करना मुश्किल है। अध्ययन अस्पताल में विभिन्न कर्मचारियों पर किया गया था, जिसमें ग्रेड 4 के कर्मचारी, जूनियर डॉक्टर, कर्मचारी और वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य शामिल थे। कुल 989 सब्जेक्ट में 88% या 869 में एंटीबॉडी थे, और उनमें से 73% को दो बार टीका लग चूका था, जबकि 13% व्यक्तियों ने पहली खुराक ली थी। इनके अलावा बचे हुए 2% में एंटीबॉडी थे जो संक्रमण के बाद पैदा हुए थे।

यह पाया गया कि 61 ऐसे व्यक्ति जिनका पूरा टीकाकरण हो चूका है और 25 ऐसे व्यक्ति जिनको एक बार टीका लगा है उनमें पर्याप्त एंटीबाडी नहीं थे। केवल 50% प्लाज्मा दाताओं के पास पर्याप्त एंटीबॉडी थे। ये व्यक्ति ठीक होने के 14 से 3 महीने बाद दान के लिए आए थे और कहा गया है कि या तो उन्होंने पर्याप्त एंटीबॉडी का उत्पादन नहीं किया या उन्होंने उन्हें समय से पहले खो दिया होगा। इसके पीछे संभावित कारण कम इम्युनिटी या संक्रमण की हल्की गंभीरता हो सकते हैं।

मेमोरी सेल्स कोरोना वायरस में काम नहीं करती


ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रमुख प्रो तुलिका चंद्रा ने कहा, "यह पर्याप्त एंटीबॉडी विकसित करने की संभावना को दर्शाता है जो प्राकृतिक तरीके से संक्रमण प्राप्त करने के बजाय टीकाकरण के माध्यम से लम्बे समय तक भी रहता है। इस समूह में एंटीबॉडी का अधिक प्रतिशत एक अच्छा संकेत है, यह और टीकाकरण के माध्यम से हर्ड इम्युनिटी की ओर इशारा करता है।" उन्होंने आगे कहा कि मेमोरी सेल्स आमतौर पर दूसरे संक्रमण से निपटने के लिए सूचनाओं को इकट्ठा करते हैं लेकिन दूसरी लहर में बार-बार संक्रमण के कई मामले होते हैं। यह इस तथ्य को दर्शाता है कि मेमोरी सेल्स कोरोना वायरस में अच्छी तरह से काम नहीं करती हैं।

जबकि छोटे पैमाने की स्टडी में आये परिणाम टीकाकरण के महत्व को उजागर करते हैं, अधिकारी बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए लगभग 4,000 के सैंपल का लक्ष्य बना रहे हैं। इसके अलावा, विकसित एंटीबॉडी के जीवन काल को निर्धारित करने के लिए टीका लगाए गए स्वास्थ्य कर्मियों का फिर से टेस्ट किया जाएगा।