अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कोरोना इलाज में इस्तेमाल किया गया 'मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी ट्रीटमेंट' (Monoclonal Antibody Therapy), अब लखनऊ के दो अस्पतालो में उपलब्ध है। यह थेरेपी आम तौर पर कोरोना के साथ अन्य गंभीर बीमारियों वाले रोगियों को दी जाती है, जहां संक्रमण के गंभीर रूप लेने की संभावना काफी अधिक होती है। एक 'इंट्रावेनस विधि' (Intravenous therapy) के माध्यम से इस थेरेपी को करने के बाद, रोगी को डिस्चार्ज करने से पहले एक घंटे तक निगरानी में रखा जाता है।

इस थेरेपी को संक्रमण के 10 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए


अब लखनऊ के मेदांता अस्पताल (Medanta Hospital) और अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (Apollomedics Super Speciality Hospital) में उपलब्ध, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट थेरेपी, लेबोरेटरी में बनने वाले प्रोटीन के साथ एंटीबॉडी का उपयोग करती है जो हानिकारक पैथोजन से लड़ने के लिए आर्टिफिशियल इम्यून सिस्टम तैयार करते है। यह थेरेपी हल्के या मध्यम कोरोना मामलों के खिलाफ प्रभावी है जहां ऑक्सीजन की सप्लाई की आवश्यकता नहीं है,इस उपचार की कीमत 60,000 रुपये है।

जैसे ही टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आए, जितना जल्दी हो सके मरीज को 10 दिन के भीतर ही मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ट्रीटमेंट दे दिया जाना चाहिए। जिससे शरीर के सेल्स में नए कोरोना वायरस के प्रवेश को रोका जा सके और शरीर में होने वाले निरंतर नुकसान को रोका जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती एक 55 वर्षीय पुरुष कोरोना रोगी पहले मरीज़ बने जिनपर यह कॉकटेल थेरेपी की गयी। इस इंट्रावेनस विधि के माध्यम से दवा देने के 60 मिनट के बाद, रोगी ने लक्षणों और वायरल लोड में काफी कमी देखी गयी।

हाल ही में भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा इस कॉकटेल थेरेपी को मंज़ूरी मिली थी और इस 'कॉकटेल थेरेपी' का इस्तेमाल 45वें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कोरोना उपचार में किया गया था। प्रसिद्ध रूप से 'ट्रम्प कॉकटेल' के रूप में जाने वाली इस थेरेपी को जिस दवा के माध्यम से मरीज़ पर किया जाता है, वह रेजेनरॉन (Regeneron) है जो की प्रयोगशालाओं में विकसित कैस्ट्रिविमैब और इम्देविमाब (Imdevimab) नामक दो आर्टिफिशियल एंटीबॉडी का कॉम्बिनेशन है।