मुख्य बिंदु

➡ लखनऊ स्थित सीडीआरआई ने दावा किया है कि कोविड -19 के उपचार में एंटीवायरल दवा, 'उमीफेनोविर' का क्लिनिकल परीक्षण सफल रहा।

➡ 'उमीफेनोविर' दवा कोरोना के हल्के, मध्यम लक्षण व उच्च जोखिम वाले मरीजों में कारगर पाई गई है।

➡ डॉ. तपस के मुताबिक कोरोना के हल्के व मध्यम लक्षण वाले मरीजों को उमीफेनोविर -800 एमजी की डोज दिन में दो बार देनी है।

➡ उमीफेनोविर कोविड -19 रोगियों के इलाज के लिए किफायती होगी क्योंकि यह वर्तमान दवा की तुलना में लगभग 54 प्रतिशत सस्ती है।

➡ कोरोना जांच की नई स्वदेशी इंडीजीनियस आरटीपीसीआर किट भी सीडीआरआई ने बनाई है।


सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई), लखनऊ ने कोरोना से लड़ने वाली दवा बनाने का दावा किया है। संस्थान के अनुसार इस एंटीवायरल दवा के तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल सफल रहा है। इस दवा के जरिये संस्थान का दावा है कि उमीफेनोविर (Umifenovir) कोरोना के हलके और एसिम्प्टोमैटिक (Asymptomatic) रोगियों के इलाज में बहुत प्रभावी है और उच्च जोखिम वाले रोगियों के लिए रोगनिरोधी के रूप में उपयोगी है। यह मात्र 5 दिन वायरल लोड को पूरी तरह से खत्म कर देता है।

लखनऊ के 3 अस्पतालों में किया गया ट्रायल


सीडीआरआई निदेशक प्रोफेसर तपस कुंडू ने बताया कि औषधि महानियंत्रक भारत सरकार (डीसीजीआई) ने पिछले साल जून में केजीएमयू (KGMU), एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (ERA's Lucknow Medical College and Hospital), तथा राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) (Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences) के सहयोग से लक्षणविहीन (Asymptomatic), हल्के (Mild) और मध्यम (Moderate) कोविड-19 रोगियों पर तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण करने की अनुमति दी थी। सीएसआईआर ने 16 दवाएं सुझाई थीं, जिनमें उमीफेनोविर (आर्बिडोल) (Umifenovir (Arbidol) का चयन किया गया।

सीडीआरआई का दावा डेल्टा वेरिएंट पर कारगर हो सकती है दवा


निदेशक प्रोफेसर तपस कुंडू ने बताया कि उमीफेनोविर (Umifenovir) टैबलेट के रूप में है। इसे सिरप और इनहेलर के रूप में विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिक्षण में ऐसे मरीज भी शामिल थे, जिनमें वायरस का डेल्टा वैरिएंट मिला था। ऐसे में माना जा रहा है कि यह डेल्टा वेरिएंट कारगर हो सकती है। उन्होंने बताया कि 132 मरीजों पर क्लीनिकल परिक्षण किया गया।

कोविड की अन्य दवाओं के मुकाबले 'ऊमीफेनोविर' बेहद सस्ती है


निदेशक ने बताया कि ऊमीफेनोविर (Umifenovir ) को देश में ही मौजूद कच्चे माल से तैयार किया गया है। कोरोना वायरस के सेल कल्चर को बेहद प्रभावी तरीके नष्ट करता है। यह मानव कोशिकाओं में कोरोना वायरस के प्रवेश को रोकता है। इसकी 5 दिन की दवा का खर्च करीब 600 रुपये तक आता है। डीसीजीआई ने क्लीनिकल परिक्षण रिपोर्ट का मूल्यांकन किया है और आपातकालीन स्वीकृति देने के लिए और अधिक संख्या में हलके लक्षण वाले रोगियों पर अध्ययन जारी रखने के लिए कहा है।

उमिफेनोविर को पेटेंट कराने में जुटा सीडीआरआई


प्रोफेसर कुंडू ने बताया कि वर्तमान परीक्षण दुनिया में पहला डबल-ब्लाइंड प्लेसीबो (double-blind placebo ) नियंत्रित क्लिनिकल परीक्षण अध्ययन है जिसमें उमिफेनोविर (Umifenovir) शामिल है। अध्ययन में इस्तेमाल की गई खुराक का पहले कभी भी सार्स-कोव2 (SARS-Cov2 ) के खिलाफ परीक्षण नहीं किया गया है। सीडीआरआई इस नई दवा उमिफेनोविर (Umifenovir) को पेटेंट कराने में जुटा है। सीडीआरआई की रासायनविदों (chemists) की टीम के कोऑर्डिनेटर डॉ. आर. रविशंकर ने बताया कि टीम में शामिल डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव, डॉ. चंद्र भूषण त्रिपाठी, डॉ. नयन घोष, डॉ. नीलांजना मजूमदार और उनके छात्रों ने परीक्षण के लिए एपीआई (API) और टैबलेट बनाने के लिए युद्ध स्तर पर एक महीने के भीतर ही दवा को संश्लेषित किया और प्रौद्योगिकी को मेसर्स मेडिज़ेस्ट गोवा ( M/s Medizest, Goa) को हस्तांतरित भी कर दिया।

सीडीआरआई ने स्वदेशी आरटी-पीसीआर जांच किट भी बनाई


सीएसआईआर-सीडीआरआई ने एक स्वदेशी आरटी-पीसीआर किट भी विकसित की है जहां सीएसआईआर-सीडीआरआई में फ्लोरोफोर्स (fluorophores ) विकसित किए गए हैं और यह तकनीक एक कंपनी को हस्तांतरित की गई है। सीडीआरआई की डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी ने लगभग 3 लाख मरीजों के नमूनों की जांच की है।