मुख्य बिंदु

➡ लोहिया संस्थान ने 100वां किडनी ट्रांसप्लांट कर नया रिकॉर्ड बनाया।

➡ डॉक्टरों ने मां की किडनी युवक को ट्रांसप्लांट कर दी।

➡ किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीज से किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया गया है।


राजधानी लखनऊ के लोहिया संस्थान ने 100वां किडनी ट्रांसप्लांट कर नया रिकॉर्ड बनाया है। इसमें मां ने बेटे के लिए किडनी दान की है और अब मरीज और डोनर की हालत में सुधार है। इस मरीज का ट्रांसप्लांट असाध्य रोग कार्ड योजना (incurable disease card scheme) में निःशुल्क किया गया है। लखनऊ निवासी 29 साल के युवक को कुछ समय से पैरों में सूजन, पेशाब कम होने, सांस लेने में दिक्कत सहित अन्य तरह की समस्याएं थी। जांच के दौरान पता चला कि उसकी किडनी में गंभीर समस्या है और इसी के चलते डायलिसिस की गई। करीब 8 महीने तक डायलिसिस करने के बाद किडनी ट्रांसप्लांट का फैसला लिया गया और इसके बाद डोनर की तलाक शुरू हुई।

मां ने दी अपने बेटे को किडनी


किडनी ट्रांसप्लांट के लिए परिवार के सदस्यों से मैचिंग कराई गई और मरीज की मां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सही पाई गई। इसके बाद डॉक्टरों ने मां की किडनी युवक को ट्रांसप्लांट कर दी। यह संस्थान में 100वां किडनी ट्रांसप्लांट है। डॉक्टरों ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और डोनर की हालत में काफी सुधार है, दोनों अभी आईसीयू में हैं और उनकी निगरानी की जा रही है। नेफ्रोलॉजी के हेड डॉ. अभिलाष चंद्रा ने मीडिया को बताया कि यह ट्रांसप्लांट असाध्य रोग कार्ड योजना के तहत किया गया है और मरीज से किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया गया है।

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फ़ॉलोअप वाले मरीज अधिक


नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अभिलाष चंद्रा का दावा है कि पहले साल में किडनी ट्रांसप्लांट दर 90 फीसदी से अधिक होती है। इसके बाद धीरे धीरे इसमें गिरावट आती है। यह मरीज की कंडीशन के ऊपर निर्भर करता है। उन्होंने बताया की संस्थान में ट्रांसप्लांट कराने वाले करीब 80 फीसदी मरीज फ़ॉलोअप में आ रहे हैं। इन मरीजों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। करीब 30 से 40 फीसदी मरीज 10 साल तक ठीक रहते हैं।

लोहिया संस्थान में 20 से अधिक मरीज ट्रांसप्लांट की वेटिंग में


डॉ. अभिलाष चंद्रा ने बताया कोविड ने किडनी ट्रांसप्लांट की रफ़्तार कुछ धीमी कर दी थी, वरना किडनी ट्रांसप्लांट का शतक बीते साल ही पूरा हो जाता। कोरोना की वजह से संस्थान में कई महीने ट्रांसप्लांट पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान मरीजों की वेटिंग भी बढ़ गई। अभी 20 से अधिक मरीज ट्रांसप्लांट की वेटिंग में है। किडनी ट्रांसप्लांट के आने वाले मरीजों की जांच पड़ताल कराने संग मैचिंग कराने में और अन्य चिकित्सकीय मानकों को परखने में करीब 2 से 3 महीने में ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। कई बार डोनर न मिलने से ट्रांसप्लांट में देरी हो जाती है। आपको बता दें कि लोहिया संस्थान में साल 2016 से किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हुआ था।