यूपी की राजधानी लखनऊ के मोहान रोड स्थित ऐतिहासिक धार्मिक घुरघुरी तालाब कई दशकों से उपेक्षित है। लेकिन अब इस ऐतिहासिक तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए सतत प्रयत्न किये जा रहे हैं। इस कार्य के लिए 157.70 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है।

इसमें से प्रथम 40 लाख रुपये की पहली किश्त जारी भी कर दी गयी है। यूपी पर्यटन विभाग द्वारा जारी किये गये बजट के साथ ही उच्च गुणवत्ता पूर्ण कार्य करने की बात कही गयी है। 19वीं सदी में एक हिंदू राजा गुरुदयाल द्वारा बनवाये गये इस तालाब के प्रति उधर के लोगों में काफी आस्था है। दूर-दूर से लोग आकर इस तालाब में पूजा-पाठ करते हैं। इस तालाब के किनारे दुर्गा व हनुमान जी का मंदिर भी है। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में काफी दूर-दूर से लोग यहां आते हैं।

तालाब से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

इस तालाब का अस्तित्व भगवान राम के समय का माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि बिठूर जाते समय सीताजी ने इसमें पैर धोए थे। इसके बाद यहां का जल अमृत बन गया था। लोग कहते हैं कि, कभी इस तालाब का जल लगाने से घाव ठीक हो जाते थे। ये पानी पीने से बीमार लोग ठीक हो जाते थे। देखरेख के अभाव में तालाब का पानी प्रदूषित होता चला गया।

आसपास के गांवों के लोग यहां कागज में अपनी अर्जी लिखकर यहां एक दीवार में लगा जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी मुरादें पूरी हो जाती है। यह करीब साढ़े चार बीघे के खुले परिसर में बना हुआ है। स्थानीय निवासी महादेव प्रसाद अवस्थी ने बताया कि तालाब को गोड़ धुली नाम से भी जाना जाता है। कालांतर में इसे दस्तावेजों में घुरघुरी के नाम से दर्ज कर दिया गया।

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