लखनऊ की सड़कों पर भीख मांगने वालों को एक बेहतर जीवन और एक कमाई का साधन देने के लिए जिला प्रशासन आगे आया है। लखनऊ में भीख मांगकर अपना गुजारा करने वालों का भी अब सर्वे होगा और इसके बाद इन्हे रोजगार के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी और शेल्टर होम में जगह दिलवाई जाएगी। इसके लिए शासन ने 3 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया है।

भिखारियों की करवाई जाएगी काउंसलिंग

नगर निगम शहर में भीख मांगने वालों को रोजगार से जोड़ने की मुहीम शुरू करने जा रहा है। इसके लिए दो निजी एजेंसियों को इनके सर्वे का टेंडर दिया गया है। अफसरों के मुताबिक, एक एजेंसी भिखारियों का सर्वे कर उन्हें शेल्टर होम तक पहुचायेगी। वहीं दूसरी एजेंसी शेल्टर होम में भिखारियों के रहने और खाने का इंतजाम करेगी। इसके तहत उन्हें जरूरी सुविधाओं के साथ वैकल्पिक रोजगार की भी ट्रेनिंग दी जायेगी। इसके अलावा एक विशेष टीम के जरिये उनकी काउंसलिंग करवाई जायेगी। अजय कुमार द्विवेदी नगर आयुक्त, ने बताया की टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जल्द भिखारियों का सर्वे शुरू होगा।

बच्चों को स्कूल भेजा जाएगा

इसके साथ ही शहर में मॉल, मंदिर, चौराहों पर बच्चे और और बच्चियों को भी भीख मांगते देखा जाता है। योजना के तहत ऐसे बच्चों को स्कूल भेजा जाएगा। इसके लिए नगर निगम निजी एजेंसी के जरिये ऐसे बच्चों की रिपोर्ट तैयार करवाएगा। इसके बाद उनके परिवारजनों की काउंसलिंग कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

1600 से अधिक लोगों के लिए तैयार किया जाएगा रोजगार का प्लेटफार्म

लखनऊ में 1600 से अधिक लोगों के लिए जिला उद्योग एवं प्रोत्साहन केंद्र जल्द ही रोजगार का प्लेटफार्म तैयार करेगा। इन लोगों को अलग-अलग विधाओं में ट्रेनिंग देकर रोजगार शुरू करने में मदद की जायेगी। ट्रेनिंग के लिए जरूरतमंद लोगों से आवदेन भी मांगे गए हैं। जिला उद्योग एवं प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त मनोज चौरसिया ने बताया की लोगों को जरदोजी कारीगरी, चिकनकारी और अन्य चीजों को करने की ट्रेनिंग दी जायेगी।

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