उच्च शिक्षा का एक समान स्ट्रक्चर बनाने के प्रयास में, उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी राज्य के विश्वविद्यालयों में एक सामान्य न्यूनतम पाठ्यक्रम (common minimum syllabus) लागू करने का निर्णय लिया है। नए शैक्षणिक सेशन से बीए, बीएससी और बीकॉम कार्यक्रमों में शुरू होगा यह नया कोर्स। एक ऑफिशियल रिलीज़ के अनुसार, नई स्ट्रक्चर छात्रों को अनेक विषयों काअध्ययन करने में सक्षम बनाएगी।

अंतःविषय विकास को बढ़ावा देंगे यूपी के विश्वविद्यालय



सामान्य न्यूनतम पाठ्यक्रम (common minimum syllabus) पैटर्न छात्रों के लिए अपने स्वयं के लिए पाठ्यक्रमों को अपने अनुसार चुनने का एक अवसर खोलेगा। उदाहरण के लिए, आर्ट्स स्ट्रीम के छात्र साइंस या कॉमर्स स्ट्रीम में से किसी एक विषय को चुन सकते हैं। इसी तरह, विज्ञान के छात्र कला या वाणिज्य के किसी भी विषय का अध्ययन कर सकते हैं- जैसे इतिहास या अर्थशास्त्र साथ में।

नया चुना गया विषय चुने हुए पाठ्यक्रम के दो प्रमुख विषयों से स्वतंत्र होगा। यह ध्यान दिया जा सकता है कि छात्रों को स्नातक के दूसरे या तीसरे वर्ष में भी अपने मुख्य विषय को बदलने की स्वतंत्रता दी गई है।

प्रत्येक पाठ्यक्रम में चौथा विषय माइनर इलेक्टिव (किसी विशेष विषय का एक पेपर) होगा। यह एक अलग फैकल्टी के एक छात्र द्वारा चुना जाएगा। इसके अलावा, दो अन्य विषय- एक वोकेशनल और एक अनिवार्य इस स्नातक पाठ्यक्रम को पूरा करेंगे। राज्य ने घोषणा की है कि कौशल विकास पाठ्यक्रम (व्यावसायिक विषय) केवल पहले दो वर्षों (चार सेमेस्टर) के लिए पढ़ाया जाएगा और प्रत्येक को तीन क्रेडिट दिए जाएंगे।

यूपी विश्वविद्यालय वार्षिक 46 क्रेडिट स्ट्रक्चर लागू करेंगे



नए सीएमएस के साथ क्रेडिट सिस्टम में भी बदलाव किया गया है। अब, 6 सह-पाठयक्रम विषय होंगे, जिनमें से प्रत्येक में 2 क्रेडिट होंगे। छात्रों को कार्यक्रम के पहले 3 वर्षों में इन विषयों को पूरा करना आवश्यक है। इसके अलावा, इन विषयों का पासिंग परसेंटेज मिनिमम 40% निश्चित किया गया है।

जबकि इन ग्रेडों का उल्लेख मार्कशीट पर किया जाएगा लेकिन वे सीजीपीए का हिस्सा नहीं होंगे। नए पैटर्न के तहत छात्रों को एक साल में 46 क्रेडिट प्राप्त करने होंगे। प्रत्येक सेमेस्टर 15 सप्ताह तक चलेगा और जहां छात्रों को योग्यता प्राप्त करने के लिए न्यूनतम अंक और डिग्री प्राप्त करने के लिए न्यूनतम क्रेडिट प्राप्त करने की आवश्यकता होगी।