उत्तर प्रदेश में 'संस्कृत भाषा' को बढ़ावा देने के प्रयास में, राज्य सरकार ने इच्छुक उम्मीदवारों को वर्चुअल ट्रेनिंग प्रदान करने का निर्णय लिया है। वे सभी लोग जो संस्कृत भाषा बोलना, पढ़ना और सीखना चाहते हैं, वे अब मुफ्त में भाषा सीख सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, नागरिक, विशेष रूप से छात्र, मिस्ड कॉल अलर्ट के साथ रजिस्ट्रेशन करके इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसके लिए 20 दिनों तक नियमित एक घंटे तक चलने वाले ऑनलाइन सेशन होंगे। जुलाई अंत से कक्षाएं शुरू होंगी।

'ईश्वरीय भाषा' को बढ़ावा देने के लिए यूपी संस्कृत संस्थान और सरकार ने मिलाया हाथ



उत्तर प्रदेश सरकार ने नागरिकों और छात्रों के बीच संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए मुफ्त वर्चुअल ट्रेनिंग सेशन शुरू करने का फैसला किया है। यह कार्यक्रम लोगों को 1 महीने के भीतर प्राचीन भाषा बोलना, पढ़ना और सीखना सिखाएगा। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार लगातार संस्कृत के प्रति प्रेम पैदा करने की कोशिश कर रही है, जो 'ईश्वर की भाषा' है और जो लोग ये 'दिव्य भाषा' सीखना चाहते हैं, उन्हें एक अवसर प्रदान करना है।"

अधिकारी ने कहा, "इसके लिए आपको एक निर्दिष्ट मोबाइल फोन नंबर पर एक मिस्ड कॉल देनी होगी, जिसके बाद फॉर्म भरकर और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। यह योजना इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी।"

प्रत्येक बच्चे को संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी सीखने की ट्रेनिंग देना

यह कदम युवाओं में संस्कृत के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उठाया गया है। संस्कृत को अब तक ज्ञात और संरक्षित सबसे पुरानी भाषाओं में से एक कहा जाता है, और आने वाली पीढ़ियों में इसे बढ़ावा देने और संस्कृति के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

वर्तमान में, राज्य यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था कर रहा है कि राज्य का प्रत्येक बच्चा हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत भाषा सीखे। यूपी संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ वाचस्पति मिश्रा ने कहा कि इच्छुक छात्रों को भाषा के सिंटेक्स और व्याकरण के अलावा नैतिक मूल्य भी दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, "हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ मुफ्त कक्षाओं के माध्यम से संस्कृत पढ़ाने का सरकार का यह एक नया प्रयास है।"