जॉर्ज लुइस बोर्जेस ने कहा था- "मैंने हमेशा कल्पना की है कि स्वर्ग एक तरह का पुस्तकालय होगा", अगर आप भी इस कथन से सहमत हैं, तो आपको लखनऊ में आमिर-उद्-दौला पब्लिक लाइब्रेरी (Amir-ud-Daula Public Library) जाकर कुछ समय ज़रूर व्यतीत करना चाहिए ! शहर के सबसे पुराने पुस्तकालयों में से एक, इसका निर्माण 19 वीं शताब्दी में किया गया था, और कई स्थानांतरणों के बावजूद, इस पुस्तकालय ने अपने अद्वितीय आकर्षण को बरकरार रखा है। इसलिए अगर आपको किताबों से बेहद प्यार है और शांत जगहों में संरक्षित पुरानी समय से जुड़ी चीज़े आपको आकर्षित करती हैं तो निश्चित रूप से यह पुस्तकालय आपको पसंद आएगा।

सदियों पुराने साहित्य को यहां सहेज कर रखा गया है।


1882 में प्रांतीय संग्रहालय का हिस्सा बनने से लेकर 1921 में सर हरकोर्ट बटलर (Harcourt Butler) द्वारा इसकी आधारशिला रखने तक, इस पुस्तकालय का विभिन्न स्थानों पर एक लंबा इतिहास रहा है। इन वर्षों के बीच, यह 1907 में लाल बारदारी के ऊपरी मंजिल पर और 1910 में छोटा छतर मंज़िल में इसे स्थापित किया गया। आखिरकार 1921 में इसका स्थानांतरण अपने वर्तमान स्थान पर किया गया था।

इसे 1887 में छात्र और पाठकों के लिए खोला गया, और ऐसा माना जाता है कि इस पुस्तकालय का नाम ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और महमूदाबाद के राजा के नाम पर आमिर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी रखा गया था। यह पुस्तकालय अवध के तालुकदारों द्वारा संयुक्त प्रांत की सरकार को उपहार में दिया गया था और आज़ादी के वर्ष 1947 में, अवध तालुकेदार्स एसोसिएशन ने इस लाइब्रेरी के सामने पड़ी खाली जमींन को लाइब्रेरी के पार्क के लिए दान कर दिया

5 से अधिक भाषाओं में लिखी गई 2 लाख से अधिक पुस्तकों का घर, अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी में पुस्तकों का सबसे दुर्लभ संग्रह है। इन पुरातन पांडुलिपियों को विलुप्त होने से बचाने के लिए, 2019 में स्थानीय प्रशासन द्वारा एक डिजिटल संग्रह का निर्माण शुरू किया गया था।

नॉक नॉक (Knock Knock)

आमिर-उद्-दौला पब्लिक लाइब्रेरी हर पाठन प्रेमी के लिए सबसे बेहतरीन जगह है, यहां उन सभी लोगों का जाना चाहिए जो किताबों, वास्तुकला और इतिहास में अपनी दिलचस्पी रखते हैं। यहां उपस्थित सदियों पुरानी किताबो को पढ़ पर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप समय में पीछे चले गए हैं। इस अनुभव के महत्व को एक पाठन और पुस्तक प्रेमी ही ठीक से समझ सकता है, इसलिए आप इतिहास को करीब से देखने का मौका न छोड़े और कुछ सुकून के पल अपनी प्रिय पुस्तकों के साथ ज़रूर व्यतीत करें।