मुख्य बिंदु

लखनऊ के चिड़ियाघर में इजरायल से लाए गए 3 जेब्रा।

तीनों जेब्रा इजरायल से रवाना होकर बीते गुरुवार को तड़के 3 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे।

चिड़ियाघर में विदेश से जेब्रा लाने की कोशिश वर्ष 2018 में शुरू की गई थी।

तीनों विदेशी जेब्रा को 15 दिनों के लिए आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

15 दिन बाद दर्शक इन्हें चिड़ियाघर में देख सकेंगे

उत्तर प्रदेश के चिड़ियाघरों में जीवों के मौजूदा बेड़े को जोड़ते हुए, लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह जूलॉजिकल पार्क में बीते गुरुवार को 3 जेब्रा का स्वागत किया गया। कथित तौर पर, दो से तीन साल की उम्र के दो नर और एक मादा जेब्रा इजरायल के ‘जूलॉजिकल सेंटर तेल अवीव-रमत गण’ (Ramat Gan “Safari” – Zoological Center Tel Aviv) से आए हैं, जिसे आमतौर पर ‘सफारी रमत गण’ (Safari Ramat Gan) के नाम से जाना जाता है। चिड़ियाघर के अधिकारियों के अनुसार, तीन जेब्रा का एक और सेट भी एक सप्ताह के भीतर लखनऊ पहुंच जाएगा।

लखनऊ के चिड़ियाघर में 7 साल बाद लौटे जेब्रा

विशेष रूप से, चिड़ियाघर में वन्यजीवों की विविध श्रेणी का और विस्तार करने के लिए विदेश से जेब्रा लाने की कोशिश वर्ष 2018 में शुरू की गई थी। चिड़ियाघर के डायरेक्टर के अनुसार, इन जानवरों को ले जाने वाला कार्गो बीते बुधवार को इजरायल से रवाना हुआ और गुरुवार को तड़के 3 बजे अबू धाबी होते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। इसके बाद जेब्रा को डॉ. बृजेंद्र मणि यादव की देखरेख में लखनऊ लाया गया। डॉ. यादव के अनुसार, ये जेब्रा 500 किलोमीटर की इस यात्रा को सफलतापूर्वक करने में सफल रहे और यात्रा के दौरान तीन बार उन्हें खाना खिलाया गया।

बीमारी के चलते 7 साल पहले दो जेब्रा का हो गया था निधन

जेब्रा को अपने पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद करने के प्रयास में, उन तीनों को जिराफ के बाड़े के पास एक आइसोलेशन वार्ड में 15 दिनों की अवधि के लिए रखा गया है। लखनऊ चिड़ियाघर के डायरेक्टर ने कहा कि इज़राइल से जेब्रा के अगले सेट के आने के बाद, एक जोड़ी जेब्रा गोरखपुर और एक कानपुर के चिड़ियाघर को भी भेजा जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि लखनऊ के पशु प्रेमी अब 7 साल के गैप के बाद फिर से जेब्रा को चिड़ियाघर में देख सकेंगे।

आपको बता दें कि साल 2015 में बीमारी के चलते मादा जेब्रा ‘संस्कृति’ का 2015 में निधन हो गया था। संस्कृति की मौत के बाद उसके साथी नर जेब्रा ‘बंकित’ ने भी साल 2016 में दम तोड़ दिया था। दोनों की मौत के बाद चिड़ियाघर जेब्रा से सुना था और उसके बाद बाड़े में शुतुरमुर्ग, एमु और लौह सारस रखे गए थे।

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