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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) करेगा लखनऊ के बड़ा इमामबाड़ा की मरम्मत।

मरम्मत के लिए एएसआई ने 75 लाख रुपये आवंटित किये।

असफ़ी मस्जिद और फारसी हॉल की 163 फीट की बालकनी को दिया जाएगा नया रूप।

 लखनऊ की कलात्मक प्रतिभा और समृद्ध अतीत के साक्ष्य के रूप में स्थापित, बड़ा इमामबाड़ा अपनी दीवारों के भीतर अनगिनत इतिहास के पन्नों को समेटे हुए है। इसी भव्य ऐतिहासिक इमारत का हिस्सा है असफ़ी मस्जिद जो की लखनऊ की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है। यह मस्जिद अब एक नया रूप पाने के लिए तैयार है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 18वीं सदी के स्मारक की मस्जिद और फारसी हॉल की 163 फीट की बालकनी के रखरखाव और मरम्मत के लिए 75 लाख रुपये आवंटित किए हैं।

भीतरी दीवारों और बालकनी के जीर्णोद्धार के लिए बजट आवंटन

एएसआई के डायरेक्टर वी विद्यावती के 31 दिसंबर के एक पत्र के अनुसार मस्जिद की भीतरी दीवारों के रखरखाव और मरम्मत के लिए 50 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि बालकनी की मरम्मत के लिए 25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।

एक वकील और विरासत कार्यकर्ता एस मोहम्मद हैदर, जिन्होंने सबसे पहले विरासत भवन के रखरखाव के काम का मुद्दा उठाया था, ने कहा कि असफी मस्जिद और फारसी हॉल की बहाली का काम लंबे समय से होना था। “मैं आभारी हूं कि एएसआई ने रखरखाव कार्य के लिए धन आवंटित किया है।”

प्राचीन इमारत की मरम्मत के बाद उम्मीद है की पर्यटकों का ध्यान आकर्षित होगा क्यूंकि बालकनी पर आवाजाही 2019 में इसकी जीर्ण-शीर्ण स्थिति के कारण प्रतिबंधित कर दी गई थी। प्रशासन के द्वारा बहाली कार्यों के लिए पर्याप्त कदम उठाना आवश्यक है ताकि इमारतें समय की बर्बादी से अछूती रहें। इसके अलावा हमे अपनी यात्राओं के दौरान साफ़ सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

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