उत्तर प्रदेश में बस अड्डों को बेहतर बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इस के चलते अब पीपीपी मॉडल पर परिवहन निगम के 17 बस अड्डों को विकसित करने के लिए बिड मसौदे के प्रस्ताव को कैबिनेट ने बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने बताया की प्रदेश में 23 बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। पहले चरण में 17 बस अड्डों को विकसित किया जाना है। इसके लिए संशोधित बिड डॉक्यूमेंटेशन का प्रस्ताव भेजा गया था जिसे कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है।

बस अड्डों पर यात्रियों की सुख-सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा


ये बस अड्डे डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, आपरेट एंड ट्रांसफर माडल पर विकसित किए जाएंगे। यानी टेंडर लेने वाली फर्म को बस अड्डा न सिर्फ डिजाइन करना होगा बल्कि उसे बनवाने के लिए वित्तीय प्रबंध भी करना होगा। नियत वर्षों तक उसका संचालन करने के बाद यह प्रदेश सरकार को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इन बस अड्डों में वेटिंग एरिया, कैफेटेरिया, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय व वाइफाइ की सुविधा दी जाएगी। बस अड्डों पर यात्रियों की सुख-सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा।

इसके पहले चरण में 17 बस अड्डे है - कौशांबी (बस स्टेशन, डिपो कार्यशाला), गाजियाबाद साहिबाबाद (बस स्टेशन, डिपो कार्यशाला), ट्रांसपोर्ट नगर (आगरा), ईदगाह (आगरा), आगरा फोर्ट, मथुरा (पुराना), कानपुर सेंट्रल (झकरकटी), वाराणसी कैन्ट (बस स्टेशन, क्षेत्रीय एवं डिपो कार्यशाला), सिविल लाइन्स प्रयागराज, जीरो रोड प्रयागराज, विभूति खंड लखनऊ (बस स्टेशन क्षेत्रीय एवं डिपो कार्यशाला), अमौसी (बस स्टेशन, डिपो कार्यशाला), चारबाग बस अड्डे, सोहराब गेट मेरठ (बस स्टेशन, डिपो कार्यशाला), रसूलाबाद अलीगढ़ (बस स्टेशन/, डिपो कार्यशाला), गोरखपुर बस अड्डे को विकसित किया जाना है।