ज़रूरी बातें

आईआईटी कानपुर ने वाराणसी के खिडकिया घाट पर एक फ्लोटिंग सीएनजी फिलिंग स्टेशन स्थापित किया है।
यह सीएनजी स्टेशन तैरता हुआ सीएनजी नावों को ईंधन देगा।
इनोवेटिव स्टेशन की बदौलत अब बनारस के घाटों पर सीएनजी से नाव चलेंगी।
आईआईटी कानपुर के एआईपीएल यह स्टेशन स्थापित किया है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर की इनक्यूबेटेड कंपनी एक्वाफ्रंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (एआईपीएल) ने वाराणसी के खिडकिया घाट पर एक फ्लोटिंग सीएनजी फिलिंग स्टेशन स्थापित किया है। अनुमान लगाए जा रहे हैं की यह अपनी तरह का एकमात्र सीएनजी स्टेशन है, जो तैरता हुआ सीएनजी नावों को ईंधन देगा, जो पर्यटकों को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक पहुंचाएंगी। स्टेशन की बदौलत अब बनारस के घाटों पर सीएनजी से नाव चलेंगी। यह देश का पहला शहर होगा, जहां नाव सीएनजी से चलेंगी।

कथित तौर पर, भारतीय गैस प्राधिकरण ने घाट का नवीनीकरण किया है, जबकि एआईपीएल ने स्टेशन के स्ट्रक्चर को पूरा करने के लिए एक मॉड्यूलर बार्ज, एक तैरता पुल और दो यात्री जेटी वितरित किए हैं। ईंधन स्टेशन का उद्घाटन 13 दिसंबर को किया गया था और यह तब से चालू है। आईये इस अपनी तरह के पहले फ्लोटिंग स्टेशन के बारे में सभी ज़रूरी बातों को जानें।

पीक बाढ़ के मौसम में भी सेवाएं देगा स्टेशन

दुनिया के पहले फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन का निर्माण ‘सेल्फ एडजस्टिंग फिक्स्ड टाइप जेट्टी टेक्नोलॉजी’ की मदद से किया गया है, जो आईआईटी कानपुर की एक पेटेंटेड नॉवेल तकनीक है, जो एक्वाफ्रंट इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी है। कुल मिलाकर, यह इनोवेशन वाराणसी में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा देगा।

ऑल-वेदर-प्रूफ डिज़ाइन को स्पोर्ट करते हुए, फ्लोटिंग सीएनजी फ्लोटिंग स्टेशन को चौबीसों घंटे चलने की क्षमता के साथ बनाया गया है, यहाँ तक कि बाढ़ के मौसम में भी, सीएनजी पाइपलाइन भी सुरक्षित है और सुचारू संचालन के लिए सभी जोखिम कारकों पर ध्यान देती है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह की संरचनाएं अब वाराणसी के अन्य घाटों पर भी तैयार की जा रही हैं। ऐसी ही एक और तैरती हुई संरचना बिहार में भी डाली गई है।

एआईपीएल के सभी संस्थापकों और अन्य योगदानकर्ताओं को बधाई देते हुए, आईआईटी कानपुर के निदेशक अभय करंदीकर ने कहा, “आईआईटी कानपुर हमेशा राष्ट्रीय हित की परियोजनाओं में योगदान देता रहा है। मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने #काशी विश्वनाथधाम में अपना योगदान दिया है।”

 

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