कानपुर गंगा नदी के किनारे स्थित है और इस वजह से, यह शहर कई घाटों का घर है। यहाँ मौजूद प्रत्येक घाट के साथ एक अनूठा पहलू जुड़ा हुआ है। वास्तव में, कानपुर के बिठूर क्षेत्र को कभी 'बावन घाटों की नगरी' (52 घाटों का शहर) के रूप में जाना जाता था, जिनमें से केवल 29 ही 1857 के विद्रोह, औद्योगीकरण और अन्य साहसिक परियोजनाओं के बाद बचे थे। इस शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से आपको परिचित कराने के प्रयास में, हमने कानपुर के 7 घाटों के डिजिटल टूर की योजना बनाई है, जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए!

पत्थर घाट



लाल बलुआ पत्थर से तराशा गया, पत्थर घाट कानपुर के परिदृश्य को दिखाता हुआ सबसे सुंदर घाटों में से एक माना जाता है। यह 19वीं शताब्दी में राजा टिकैतराई द्वारा बनाया गया था और कई सिनेमाई प्रस्तुतियों में पृष्ठभूमि के रूप में दर्शाया गया यह घाट कानपुर में सौंदर्य का दूसरा नाम बन गया है।

सरसैय्या घाट



इस चित्र में दिखाई देने वाली बंजर भूमि कभी सरसई वन के हरे भरे पेड़ों से लदी थी और सरसैय्या घाट क्षेत्र का उपयोग ब्रिटिश सैनिकों द्वारा हथियारों के भंडारण के लिए किया जाता था। 150 साल बाद, जबकि ये ऐतिहासिक संरचनाएं समय के साथ होने वाली गिरावट का शिकार हो गई हैं, पर्यटक इस जगह पर गंगा मेला उत्सव और गंगा आरती देखने के लिए आते हैं।

लक्ष्मण घाट



घाट ज्यादातर हिंदू मंदिरों से जुड़े हुए हैं, क्योंकि सूर्योदय के आसपास ईश्वर को पवित्र जल चढ़ाने की प्राचीन परंपरा ने इस तरह की वास्तुकला को जन्म दिया। लक्षम घाट को जो चीज दूसरों से अलग करती है, वह यह है कि इसके परिसर में एक मस्जिद भी है। इस धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण की उत्पत्ति अल्मास अली खान से हुई है, जिसे 18वीं शताब्दी में नवाब शुजा-उद-दौला द्वारा बिठूर का प्रशासन सौंपा गया था।

कलवरी घाट



कानपुर में गंगा नदी के तट पर स्थित कलवरी घाट ने इतिहास में एक विशेष स्थान बनाया है क्योंकि यह प्रसिद्ध गणेश मंदिर का घर है, जिसे पेशवा द्वारा बनाया गया है। यह घाट शहर के सबसे दर्शनीय स्थलों में से एक है जहाँ आप पक्षियों के चहकने की आवाज़ सुनकर अपने अंतर की आवाज़ सुन सकते हैं।

ब्रह्मवर्त घाट



लोकप्रिय रूप से 'बिठूर के पवित्र घाटों में सबसे पवित्र' के रूप में जाना जाने वाला इस ब्रह्मवर्त घाट को अपने आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। पौराणिक कथाओं ने हिंदू धर्म के अनुयायियों को यह विश्वास दिलाया है कि यह वह स्थान है जहां भगवान ब्रह्मा ने मानव जाति को अस्तित्व में लाये थे। इस जगह की रहस्यमयी आभा कुछ ऐसी है जिसे सिर्फ अनुभव किया जा सकता है, समझाया नहीं जा सकता!

परमत घाट



यदि आप एक दिन के लिए उन टेढ़े मेढ़े रास्तों का अनुभव करना चाहते हैं जहाँ प्राचीन दुनिया के आकर्षण को उजागर करते हैं, तो परमत घाट के पास का क्षेत्र पूरी तरह से आपके के लिए अनुकूल होगा। जब आप यहां आएं, तो आप प्रसिद्ध आनंदेश्वर मंदिर के दर्शन करके अपने धार्मिक आकर्षण को शांत कर सकते हैं। इसके अलावा, यह घाट शानदार सूर्योदय या सूर्यास्त के नज़ारों के साथ अत्यधिक आकर्षक लगता है!

सत्ती चौरा घाट



सत्ती चौरा घाट का नाम 1857 के विद्रोह के दौरान एक अहम् भूमिका के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज है। यहीं पर नाना साहब के नेतृत्व में भारतीयों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों पर जीत हासिल की थी। नरसंहार घाट के रूप में लोकप्रिय, इस जगह की शांत आभा उन भयानक लड़ाइयों की गवाही देती है जो इस घाट ने देखे हैं!

यदि गहराई से देखा जाए, तो सामान्य पर्यटन स्थलों के अलावा, कानपुर में देखने योग्य बहुत कुछ है। हमें उम्मीद है कि जब आप इन 7 घाटों की खोज शुरू करेंगे, जब महामारी कम होगी, तो यह यात्रा आपके लिए बेहद दिलचस्प होगी। अगर आप एक कानपुरवासी हैं, तो हमें नीचे कमेंट में बताएं की माहमारी से पहले आप किस घाट पर जाकर सर्वाधिक आनंद लेते थे?