कानपुर शहर में गंगा के सुरम्य दृश्यों के बीच अपनी खाली शाम बिताना पसंद करने वाले नागरिकों के बीच गंगा बैराज काफी लोकप्रिय स्थान है। यह वर्षों से स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए समान रूप से एक आदर्श स्थान रहा है। यह 621 मीटर लंबा पुल 1995 में बनाया गया था और लगातार बदलावों से गुजरा है जिनसे इसकी सुंदरता में केवल इजाफा ही हुआ है। विशेष रूप से एक सनसेट पॉइंट के रूप में प्रसिद्ध, यह किसी खूबसूरत चित्रित पोस्टकार्ड जैसा प्रतीत होता है। इसके पहले की आप यहाँ स्वयं आकर यहाँ की सुंदरता से रूबरू हों, हम आपको इस ऐतिहासिक ब्रिज के एक वर्चुअल टूर पर लेकर चलते हैं जिसे गंगा बैराज के रूप में जाना जाता है।

कानपुर को कई शहरों से जोड़ता है


गंगा बैराज कानपुर के आजाद नगर-नवाबगंज क्षेत्र में गंगा नदी पर बना एक बांध है। एक आदर्श पर्यटन स्थल होने के अलावा, यह अक्सर सुबह की सैर करने वालों और अन्य व्यायाम उत्साही लोगों द्वारा भी काफी पसंद किया जाता है। हाल ही में, पुलिस कर्मियों ने भी अपने गुड मॉर्निंग कानपुर अभियान के लिए इस स्थान पर प्रचार किया।

पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) द्वारा निर्मित, इस बांध को लव कुश बैराज के नाम से भी जाना जाता है जो कानपुर और रामायण के युग के बीच संबंध को दर्शाता है। इसके निर्माण पर 695 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और इसके आसपास के क्षेत्र में चल रही कई विकास परियोजनाओं ने इस क्षेत्र को एक ऐतिहासिक पर्यटक आकर्षण में बदल दिया है।

इसके अलावा, गंगा बैराज राष्ट्रीय हाईवे 91 के लिए एक हाईवे बाईपास है, जो कानपुर शहर को फरीदाबाद, लखनऊ, दुर्गापुर, प्रयागराज, आगरा, आसनसोल, वाराणसी, धनबाद, मथुरा और बर्धमान से जोड़ता है। इसलिए, भले ही आपके पास इस क्षेत्र को विस्तार से देखने के लिए पर्याप्त समय न हो, लेकिन जब आप यहां से गुजरते हैं तो आप हमेशा इसकी सुंदरता की एक झलक ले सकते हैं।

नॉक नॉक

कानपुर के गंगा बैराज में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अपने ग्रुप के साथ मस्ती से भरी गतिविधियों में शामिल हों। हालाँकि, इस बांध में कई मौतें हुई हैं, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि आप यहाँ सभी आवश्यक सावधानियों का पालन करें, खासकर मानसून के दौरान।