सभी जीव-जंतुओं के प्रति दयाभाव, प्रेम और आत्मीयता हमें एक बेहतर इंसान बनाती है। एक मनुष्य होने के नाते, हम सभी के मन में इन बेजुबान जानवरों के प्रति एक ज़िम्मेदारी का भाव होना ज़रूरी है, इस बात को भली-भांती समझते हुए, कानपुर के विवेक तिवारी पिछले 9 वर्षों से एक एनजीओ के ज़रिए पशुओं की सेवा में लगे हुए हैं।

'बेजुबान' एनजीओ ने कई असहाय जानवरों की सहायता के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाएं, जिसके चलते आज यह लगभग 40 बेसहारा पशुओं का घर बन चुका है। पिछले कई वर्षों से यह संस्था लगातार ज़रूरतमंद जीवों की दयाभाव के साथ सेवा कर रही है।

विवेक का इंजीनियरिंग करने के बाद से 'होम वेट' बनने तक का सफर


इस पहल की शुरूआत तब हुई जब कॉलेज के दिनों में, विवेक को एक बार अपने घर के बाहर एक कुत्ता मिला, उन्होंने उस कुत्ते को पाला और कई वर्षों तक उसकी देखभाल की, इस कहानी में एक दुखद मोड़ तब आया जब एक दिन, एक कार उस कुत्ते के पैरों को कुचलते हुए गुज़र गई और उसे विकलांग बना दिया। एक छात्र होने के नाते, उसके पास दीन पशु का इलाज कराने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए विवेक ने शोध किया और खुद ही उसका इलाज करना शुरू कर दिया।

दुर्भाग्य से, बहुत प्रयासों के बाद भी, कुत्ता ठीक नहीं हो सका, और अंततः तिवारी को उसे पास के पशु चिकित्सक के पास ले जाना पड़ा। वहां पहुंचने पर, उन्होंने महसूस किया कि वह पशु ऐसे असहनीय दर्द को झेल रहा था जिसे वह व्यक्त करने में भी सक्षम नहीं था, जिसने 'बेजुबान' के विचार को जन्म दिया।

इस दिन उन्होंने अपने जीवन को उन जीवों की देखभाल करने के लिए समर्पित करने का फैसला किया, जो लाचार हैं और जिन्हें मदद की जरूरत है। पशुओं की सूची में कुत्ते, पिग, बिल्लियाँ, गाय जैसे कई जानवर शामिल हैं। विवेक के अनुसार, उन्होंने कई ऐसी घटनाओं का सामना किया था जहां स्थानीय क्लीनिकों द्वारा जानवरों की ठीक से देखभाल नहीं की गई थी, जिसने उन्हें 'होम वैट' बना दिया और फिर उन्होंने कभी जीवन में पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

40 पशुओं को रहने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान किया


लखनऊ के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग करने के बाद भी, विवेक ने बेसहारा जीवों को आश्रय प्रदान करने के लिए अपना जीवन समर्पित करके अपनी इंसानियत का परिचय दिया है। नॉकसेंस से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अपने माता-पिता और करीब 40 पशु सदस्यों के साथ रहते हैं, जिनके पास अलग बंकर और एक सुरक्षित जगह है रहने के लिए।

वर्तमान में, वह स्वयं ज़रूरतमंद पशुओं का इलाज करता है, लेकिन किसी भी बड़ी सर्जरी के मामले में, स्थानीय पूर्व सैन्य पशु चिकित्सक, डॉ केसरवानी, न्यूनतम लागत पर प्रक्रियाओं की देखभाल करते हैं। इसके अलावा, अपने माता-पिता, एक साथी सहयोगी और कुछ पार्ट-टाइम सदस्यों की मदद से, विवेक 'बेजुबान' का समर्थन करने के लिए धन जुटाने के लिए 'विविड कम्युनिकेशंस' नामक एक केपीओ चलाता है।

नॉक-नॉक


विवेक अकेले एनजीओ चलाने की लागत वहन करते हैं, जो 'बेजुबान' निवासियों को उचित चारा, आश्रय, चिकित्सा उपचार आदि प्रदान करने के लिए प्रति माह 1 लाख से अधिक तक आता है। इसके अतिरिक्त, विवेक सड़कों पर विकलांग लोगों का चिकित्सकीय उपचार भी करता है, जो किसी भी कारण से घायल पाए गए हैं।

हमारा आप सभी से अनुरोध है कि ऐसे लोगों की मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाएं, जो निःस्वार्थ अन्य जीव-जंतुओं की सेवा में लगे हुए हैं, और जो इन मूक पशुओं की आवाज़ बनकर उभरे हैं। विवेक तिवारी का काम और जानवरों के प्रति समर्पण प्रशंसनीय है, वह निरंतर पूरी निष्ठा से इस काम में लगे हुए हैं, और आप भी उनकी इस मुहिम से जुड़ कर निस्वार्थ कार्यों में सहायता कर सकते हैं।

पता: एच. नंबर 15/3, आज़ाद नगर, नवाबगंज विष्णुपुरी कॉलोनी के पास, कानपुर 208002

नंबर: 7388276844

-इनपुट: एकता श्रीवास्तव, अवनिता अग्रवाल