एक नई उपलब्धि के रूप में, कानपुर का हैलेट अस्पताल स्टेम सेल थेरेपी से लाइलाज रोगों का इलाज करने वाला पहला मेडिकल कॉलेज बन गया है। हैलेट में बुधवार को रीजेनरेटिव मेडिसिन विभाग शुरू होने के साथ शाम को सेलिब्रल पैल्सी से जूझ रहे पांच साल के बच्चे को थेरेपी दी गई।

बच्च के अस्थि मज्जा से निकाले गए स्टेम सेल

रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई से आए बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने प्राचार्य प्रो. संजय काला के साथ मिलकर यह प्रोसीजर किया गया। जिसमें रोगी की ही अस्थि मज्जा से स्टेम सेल निकाली गई। इन्हें कल्चर करने के बाद उसकी रीढ़ में डाला गया।

प्राचार्य डॉ. काला ने बताया कि रीढ़ के जरिये स्टेम सेल सेरिब्रल पैल्सी के रोगी के मस्तिष्क  तक पहुंच जाती हैं। स्टेम सेल से क्षतिग्रस्त कोशिकाएं दुरुस्त होने लगती हैं।

इन रोगों में दी जाएगी स्टेम सेल थेरेपी

ऑटिज्म, मांसपेशियों की डिस्ट्रॉफी, स्पाइनल कॉर्ड की चोट के ऐसे रोगी जो 108 दिन के इलाज के बाद ठीक नहीं हुए। एएलएस, आस्टियो आर्थ्राइटिस, बर्जरी डिजीज, पेरीफ्रल आर्टरी डिजीज आदि।

 

 

 

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