कानपुर शहर, भैया इस शहर की बात ही कुछ ऐसी है की, कानपुर से लेकर मुंबई तक हर कोई इस शहर का, यहां की भाषा और बोल चाल का दीवाना है। याद है टशन फिल्म में जब सैफ अली खान कहते है, ” मुझे अकल्मन्द बनना पड़ेगा, खतरनाक बनना पड़ेगा, कनपुरिया बनना पड़ेगा”, ये डायलॉग सुनते ही कानपुर के लोगों का सीना चौड़ा हो जाता है।

हो भी क्यों न, आखिर कानपुर और यहां के लोगों का वर्चस्व ही कुछ ऐसा है। कानपुर का भौकाल ऐसा है की सोशल मीडिया, फिल्म, टेलीविजन और विज्ञापनों में भी अब कनपुरिया भाषा और शब्दों का भौकाल टाइट होता जा रहा है।

बॉलीवुड फिल्म तनु वेड्स मनु में जब कंगना रनौत अपने पति से परेशान होकर कहतीं हैं, ” सब तिलंडी में चला गया और जिंदगी झंड हो गई”, ये सुनते ही लोगों की हसी निकल गई थी। दरहसल, कानपुर की आम बोल चाल है ही ऐसी, की अगर गुस्से में भी आपको कोई कुछ बोल रहा होगा, तो आप मुस्कुराये बिना नहीं रह पाएंगे। कानपुर के लोगों का बातचीत करने का तरीका बड़ा ही मजाकिया है।

 

ज्यादा बड़ी अम्मा न बनौ।

यार टोपा हो क्या बिल्कुल एकदम।

भाई भौकाल एकदम टाइट है।

ज्यादा रंगबाज़ी न पेलो।

गुरु व्यवस्था टाइट है।

अबहिं मार मार के हनुमान बना देबे।

काहे खींसे बघारे रहे हो। 

ये कुछ पंक्तियां  है, जो अक्सर आपको कानपुर में लोग आम बोल चाल में बोलते हुए दिखाई पड़ेंगे। तो आइये अब हम आपको बताने जा रहे है कानपुर के उन धांसू स्लैंग्स (slang) के बारे में जो कानपुर शहर समेत पूरे उत्तर प्रदेश से लेकर मुंबई तक बहुत फेमस है।

बकैती, बकैत

हम सब के दोस्त यारों में कोई न कोई फेकू ऐसा जरूर होता ही है, जो बढ़ी बढ़ी बातें फेकता है । जैसे की मान लो, आपके दोस्त ने अपनी क्रश को मैसेज किया हो, और बात सिर्फ  ‘hi’ से आगे हुई न हो, लेकिन भाई साहब बढ़ा चढ़ा कर इतनी बातें बताते है की, समझ में आ ही जाता है की यार ये बहुत बड़ा ‘बकैत’ है।

अबे बहुत बड़ा बकैत है ये !

बौड़म

बौड़म का मतलब होता है, ऐसा व्यक्ति जो मंदबुद्धि हो, जिसे कुछ भी समझाना आसान न हो ! कनपुरिया भाषा में लोग कहते है, ” अबे कितने बौड़म हो ? इतना भी नहीं पता !

भौकाल 

कानपुर का ‘भौकाल’ ही है जो मुंबई से बॉलीवुड वाले दौड़-दौड़ कर कानपुर में अपनी पिक्चर की शूटिंग करने आते है।  भौकाल एक ऐसा शब्द है, जो कानपुर और पूरे उत्तर प्रदेश में आम बोल चाल में खूब बोला जाता है।  भौकाल शब्द सामान्य बोलचाल की भाषा मे दिखावटी रूतबे अर्थात बढ़ा-चढ़ा कर पेश किये गए रुतबे को बताने के लिए किया जाता हैं।

तेरे भाई का भौकाल है यहां !

यार, कालीन भइया बहुत भौकाल मचाएं हैं मिर्जापुर में !

चौकस 

कानपुर में अच्छा नहीं, सब ‘चौकस’ होता है। कनपुरिया हर चीज को परिभाषित करने के लिए ‘चौकस’ का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे ऐसे ही बोल रहे हैं या वास्तव में सराहना कर रहे हैं।

तनु वेड्स मनु बहुत ही चौकस फिल्म थी यार !

चिकाई 

केवल पक्के कनपुरिया ही इस वाक्य का अर्थ बता सकते हैं।  चिकाई का मतलब होता है, किसी का मजाक उड़ाना, लेकिन अत्यधिक अपमानजनक तरीके से नहीं, सिर्फ मज़ाकिया तौर पर किसी से मज़े लेने को कनपुरिया भाषा में चिकाई कहते है।

अबे आज तो उसने तुम्हारी बहुत चिकाई ले ली बे !

चिरांद 

कानपुर पर आधारित एंड टीवी के सीरियल ‘भाबी जी घर पर हैं’ में दरोगा हप्पू सिंह को तो आप जानते ही होंगे। हप्पू सिंह का बार-बार ये कहना कि तुम बहुत बड़े चिरांद हो ! चिरांद मतलब है की, ऐसा व्यक्ति जिसके व्यवहार से सबको परेशानी हो, फिर भी वह अपना स्वभाव न बदले।

तू बहुत बड़ी चिरांद है !

कंटाप

कानपुर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कंटाप शब्द आम बोल चाल में इस्तेमाल होता है। आप थप्पड़ मारते होंगे, लेकिन कानपुर के लोग घुमा के कंटाप मारते हैं।

एक घुमा के कंटाप देंगे न झुमरी तलइया पहुंच जाओगे !

खलीफा 

जब अति-विश्वास की सीमा पार हो जाये, और आप दिखावे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाएं, तो इस रवैये को रोक कर रखें वरना आपको कानपुर में ‘खलीफा’ करार दे दिया जाएगा।

गाड़ी आराम से चलाओ ज्यादा खलीफा न बनो समझे !

लभेड़

लभेड़ का मतलब है, अप्रिय परिस्थिति। जब कोई दुसरो की लड़ाई में बिना मतलब के कूद पड़े और बिन बुलाई मुसीबत मोल ले ले , उसे कनपुरिया भाषा में लभेड़ कहा जाता है।

दुसरो के पचड़े में पड़कर अपना लभेड़ क्यों बढ़ा रहे हो ? 

पउवा

अगर आपके चाचा विधायक है, तो ऊपर तक पहुंच भी होगी, जुगाड़ से सारे काम आसानी से करवा देते होंगे। आखिर डर किस बात का चाचा विधायक है, चाचा का पउवा है।

चाचा विधायक है हमारे, पउवा है तेरे भाई का, एक फोन से काम होगा !

 रंगबाज़ी

रंगबाज़ी का मतलब है, ज्यादा दिखावा करना या ओछापन करना। लेकिन कानपुर में कभी-कभी इसका इस्तेमाल किसी की शैली की सराहना करने के लिए भी किया जाता है।

जरा कायदे में रहो, ज्यादा रंगबाज़ी न झाड़ो !

नॉक नॉक (Knock Knock)

कानपुर शहर का अपना एक अलग अंदाज है, और कानपुर का भौकाल मुंबई की मायानगरी तक है।  ये कानपुर की अपनी एक अलग पहचान ही है जो आज कनपुरिया भाषा को लोग दूर दूर तक जान और समझ रहे हैं। हम उम्मीद करते है इन सभी स्लैंग्स को आपने सुना होगा, अगर नहीं सुना तो आज ही अपने कानपुर वाले दोस्त को फोन करें और पूछें, कानपुर का कितना भौकाल है। इसके साथ ही कमेंट कर हमें जरूर बताएं की कानपुर में और कौन कौन से स्लैंग्स आम बोल चाल में इस्तेमाल होते हैं।

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