वर्तमान में भारत की कंपनियों को ड्रोन निर्माण के लिए आवश्यक उपकरण प्राप्त करने के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि,आईआईटी कानपुर मानव रहित हवाई वाहन (Unmanned Aerial Vehicle) प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है, जिससे 'मेक इन इंडिया' के सपने को आगे बढ़ाया जा सके। जल्द ही यहां ड्रोन सेंटर खोला जाएगा और इसके लिए प्रस्ताव को मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय भेजा गया है।

इस साल के अंत तक कार्यात्मक होने की उम्मीद है


इस आगामी केंद्र में ड्रोन, हवाई जहाज और अन्य यूएवी का निर्माण और टेस्टिंग किया जाएगा जिसका वर्ष के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। टेस्टिंग प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए, कॉलेज परिसर के भीतर एक उड़ान क्षेत्र का बनाया जाएगा। इसके अलावा, जैसे जैसे आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर ड्रोन में रिसर्च की रफ़्तार बढ़ेगी, यह युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा,क्योंकि संस्थान स्टार्ट-अप आइडियाज को बढ़ावा देने के लिए लोकप्रिय है।

ड्रोन के केंद्र का महत्व

सेंटर फॉर ड्रोन विभिन्न विभागों द्वारा की गयी खोज और बचाव कार्यों के साथ-साथ सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने में मदद करेगा। इसलिए, यह पुलिस, सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), स्वास्थ्य विभागों और निजी कंपनियों की जरूरतों को पूरा करेगा।

इसके अलावा यह केंद्र 'मेक इन इंडिया' के सपने को साकार करने में मदद करेगा, क्योंकि यह विदेशों पर निर्भरता को कम करने के लिए तैयार किया गया है। वर्तमान में, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों में बनाये जाने वाले ड्रोन के पार्ट की तुलना में बैटरी, सेंसर, कैमरा और इंजन जैसे ड्रोन भागों को चीन, ताइवान और इज़राइल से इम्पोर्ट किया जाता है जिससे सस्ता विकल्प प्राप्त किया जा सके। महामारी की शुरुआत के साथ, यह मुश्किल हो गया है, यही वजह है कि इस केंद्र को जल्द से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

(Unmanned Aerial Vehicle)