उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट को पूरा करने के काम को तेज कर दिया है। मेट्रो के काम में तेज़ी लाते हुए प्रायोरिटी कॉरिडोर पर एलिवेटेड ट्रैक के लोड टेस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पूरे खंड पर 2 स्थानों पर लोड टेस्टिंग की जायेगी। जहां आईआईटी-कानपुर और कल्याणपुर के बीच आई-गर्डर्स पर 'लोड टेस्ट' शुरू हो गया है, वहीं रावतपुर में यू-गर्डर्स और स्टील बॉक्स गर्डर्स पर जल्द ही टेस्टिंग की जायेगी।

मेट्रो ट्रेन की तुलना में 1.25 गुना भारी भार के साथ ट्रैक की सहनशीलता का टेस्ट किया जाएगा



कथित तौर पर, ट्रैक की ताकत और सहनशीलता का टेस्ट एक भारी भार के साथ किया जाएगा, जो मेट्रो ट्रेन के वजन से लगभग 1.25 गुना अधिक है। यह यात्रियों से भरी ट्रेन के भार को वहन करने के लिए ट्रैक का टेस्ट करने में मदद करता है।

मौजूदा योजनाओं के तहत 245 टन से अधिक लोड ट्रैक पर रखा जाएगा और 5 चरणों में वजन जोड़ा जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, कल्याणपुर स्टेशन पर रेत से भरे बोरों को पहले से ही समतल किया जा रहा है और उसके बाद ट्रैक की क्षमता को टेस्ट करने के लिए भार वहन क्षमता की रीडिंग ली जाएगी।

नवंबर में होगा पहला ट्रायल



बताया गया है कि सितंबर के अंत तक पहला मेट्रो सेट कानपुर पहुंच जाएगा। इसके अलावा, योजनाओं के अनुसार नवंबर के महीने में इस प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर ट्रायल रन किया जाएगा। इसे देखते हुए अधिकारी जल्द से जल्द ट्रैक तैयार करने का आश्वासन देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अधिकारियों ने आई-गर्डर, यू-गर्डर और स्टील बॉक्स के लिए लोड टेस्टिंग इंटरवेंशन के साथ परियोजना के कार्य में तेजी लाई है।

विशेष रूप से, मेट्रो प्रबंधन ने यातायात को बेहतर करने के लिए अपनी पटरियों और स्टेशनों के नीचे की सड़कों को ठीक करने की जिम्मेदारी भी उठाई है। इस तथ्य को देखते हुए कि पहले चरण में आईआईटी कानपुर और मोतीझील के बीच मेट्रो ट्रेनों की शुरुआत होगी, इस खंड की सड़कों में जल्द ही सुधार की उम्मीद है।