कोरोना संक्रमित मरीज की आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट आने में लगभग 48-72 घंटे का समय लग जाता हैं, और इस दौरान अधिकतर मरीज़ों की तबियत और खराब हो जाती है। इसी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए और मरीज़ों को जल्द से जल्द एक्स-रे के परामर्श प्रदान करने के लिए आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र 'उमाकांत सोनी' ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IISC) बेंगलुरु और एआई इंडिया और रोबोटिक्स टेक्नोलॉजीज पार्क (ARTPARK) के सहयोग से एक्सरे सेतु को विकसित किया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा संचालित, एक्सरे सेतु 14 फेफड़ों की बीमारियों का पता लगा सकता है और कोरोना मामलों में शीघ्र इलाज की सुविधा प्रदान करने में सहायक साबित हो सकता है।

300 से अधिक डॉक्टरों की सफलतापूर्वक मदद की


उमाकांत सोनी ने आईआईटी कानपुर से एनवायरनमेंट इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। अपने अनुभवों और पढ़ाई को एक नेक काम में इस्तेमाल करते हुए उमाकांत सोनी ने एक फ्री-टू-यूज़ प्लेटफॉर्म- एक्सरे सेतु विकसित किया है, जो एक अद्वितीय ट्रांसफर लर्निंग फ्रेमवर्क है। यह एक एआई-आधारित ऐप है जिसका उपयोग भारत में कहीं भी डॉक्टरों द्वारा किया जा सकता है। गौरतलब है की डॉक्टर व्हाट्सएप चैटबॉट (WhatsApp Chatbot) के माध्यम से जल्द से जल्द चेस्ट के एक्सरे की जांच कर सकते है।

एक्सरे सेतु को विकसित करने में एक वर्ष से अधिक का समय लग गया। पिछले 10 महीनों में, एक्सरे सेतु ने मोबाइल फोन से भेजी गयीं एनालॉग के साथ-साथ डिजिटल एक्स-रे और कम-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों के माध्यम से बीमारियों की जांच करने में 300 से अधिक डॉक्टरों की सफलतापूर्वक मदद की है।

एक्सरे सेतु का उपयोग कैसे करें ?

इस ऐप की विशेषताओं का उपयोग करने के लिए, आपको इसकी ऑफिशल वेबसाइट https://www.xraysetu.com/ पर जाना होगा और 'ट्राई द फ्री एक्सरे सेतु बीटा' टैब पर क्लिक करना होगा। यह आपको दूसरी विंडो पर ले जाएगा जहां आप व्हाट्सएप चैटबॉट (Whatsapp chatbot) से जुड़ सकते हैं। आपको एक नंबर प्रदान किया जाएगा जिसपर आप अपना चेस्ट का एक्स-रे साझा कर सकते हैं और आधे घंटे के भीतर एक डायग्नोस्टिक रिपोर्ट आपको भेज दी जाएगी।