उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एक परियोजना शुरू की है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रेरणा ओजस कार्यक्रम के तहत, राज्य ने स्वयं सहायता समूहों को जिलों में बच्चों के लिए 'सौर ऊर्जा लैंप' तैयार करने का अवसर दिया है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं में आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगी और दूर-दराज के क्षेत्रों में बच्चों के लाभ के लिए काफी कम लागत पर रोशनी भी फैलाएगी।

आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ाया एक और कदम


उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग और सीएसआर फंड ने स्वयं सहायता समूहों को स्कूली बच्चों के लिए सोलर लैंप बनाने का मौका दिया है। इन्हें ₹500 प्रति लैम्प के उच्च बाजार मूल्य की तुलना में ₹100 प्रति यूनिट की कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब यूपी में इस तरह की पहल शुरू की गई है, इससे पहले भी राज्य ने उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में 75 ब्लॉकों में स्कूली बच्चों को 4,000 महिलाओं द्वारा निर्मित लगभग 28 लाख सोलर लैंप वितरित किए थे।

कानपुर देहात के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि इस परियोजना से दोगुना लाभ मिलेगा। इस पहल से बच्चों को पढ़ाई में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि, जिले के लिए यह गर्व की बात है कि सोलर लैंप बना रही महिलाओं ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने का भी रास्ता बनाया है।

स्वयं सहायता समूहों ने सोलर लैंप बेचकर कमाए एक लाख रुपये


प्रारंभ में प्रेरणा ओजस कार्यक्रम 18 समूहों में शुरू किया गया था और इन संगठनों की 35 महिलाओं को सोलर लैंप बनाने और उन्हें बेचने का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए चुना गया था। परौंख गांव में इस काम के लिए एक इकाई भी स्थापित की गई थी। कानपुर देहात जिले के मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि लगभग 10,758 ग्रामीण महिलाओं की सहायता के लिए अब यहां लगभग 978 स्वयं सहायता समूह स्थापित किए गए हैं।

जिले की मुख्य विकास अधिकारी (Chief Development Officer) ने बताया कि कानपुर देहात में ग्रामीण स्कूली बच्चों के उपयोग के लिए बाजार मूल्य से सस्ते सोलर लैंप का निर्माण महिलाएं कर रही हैं। प्रेरणा ओजस कार्यक्रम के सीईओ के अनुसार, प्रत्येक महिला को निर्माण के लिए ₹12 और प्रत्येक लैंप की बिक्री के लिए ₹17 दिए जाते हैं। इससे उनका दैनिक वेतन ₹250-₹300 हो जाता है। अब तक 1000 सोलर लैंप का उत्पादन किया गया है और उन्हें ब्लॉक के परिषदीय स्कूलों में विद्यार्थियों को 100 रुपये प्रति लैंप के मूल्य में बेचा जा चूका हैं, जिससे बच्चों को पढ़ने में सुविधा हो रही है। महिला सहायता इकाइयों ने सोलर लैंप की बिक्री से ₹1 लाख की आय अर्जित की है।

स्वयं सहायता समूहों से लेकर भविष्य के उद्यमी


मिशन के तहत महिला सहायता समूह जरूरत पड़ने पर मरम्मत कार्य भी करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादित लैंप की वैधता फरवरी 2022 तक है। कार्यक्रम के सीईओ ने कहा कि यदि सोलर लैंप के वितरण लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है तो भविष्य में ग्रामीण समूह की महिलाओं को उद्यमी बनने का अवसर भी मिलेगा।

उन्हें ब्लॉक के विभिन्न कस्बों और बाजारों में प्रेरणा सोलर स्मार्ट शॉप स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। लैंप के अलावा, महिलाएं सोलर शॉप पर लालटेन, फ्लैशलाइट, लैंप, सोलर पंखे, पैनल, एलईडी बल्ब सहित विभिन्न सोलर उपकरण और उत्पादों को बेचने और मरम्मत करने का काम भी कर सकती हैं। ये दुकानें अन्य महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी काम करेंगी।