कानपुर विकास प्राधिकरण ने संपत्तियों को वैरिफाई करने और शहर भर में अवैध निर्माण पर नजर रखने के लिए रिमोट सेंसिंग ऐप को इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय को विकास एजेंसी की एक बैठक में अंतिम रूप दिया गया था, जिसे केडीए संपत्तियों की पहचान करने में तकनीक के उपयोग का पता लगाने के लिए नियोजित किया गया था। आधुनिक तकनीक के प्रयोग से प्राधिकरण की संपत्तियों का चिह्नित किया जाएगा, लेआउट को डिजिटल इमेज पर लाकर जांच की जा सकेगी जिससे एजेंसी को निर्धारित मानदंडों में किसी भी अनियमितता को कुशलतापूर्वक जांचने में सहायता मिलेगी।

संपत्तियों का चिह्नांकन कर लेआउट को डिजिटल ईमेल पर लाया जाएगा



केडीए के उपाध्यक्ष और अन्य अधिकारियों ने रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के वैज्ञानिक के साथ रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी के अनुप्रयोगों पर चर्चा की। इस बैठक के अनुसार, यह निर्णय लिया गया है कि सॉफ्टवेयर, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया कार्टोसैट उपग्रह द्वारा एकत्र की गई छवियों को लेकर कानपुर में संपत्ति परिदृश्य का एक वर्चुअल ग्राफ तैयार करेगा।

केडीए रिमोट सेंसिंग से यह जानकारी हासिल करेगा कि उसकी ऐसी कौन से संपत्तियां हैं, जिनका मानचित्र स्वीकृत नहीं और उन पर कब्जे हो रहे हैं। केडीए की संपत्तियों के सत्यापन व निस्तारण के संबंध में कहा गया कि संपत्तियों का चिह्नांकन कर लेआउट को डिजिटल ईमेल पर लाया जाए।

इसके अलावा, यह केडीए की आवासीय संपत्तियों को भी मान्य कर सकता है। यह अतिरिक्त सहायता केडीए को अपने राजस्व को प्रबंधित करने और बढ़ाने के लिए, खाली या गैर-आवंटित भूखंडों / भवन श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले भवनों को आवंटित करने में मदद करेगी।

रिपोर्ट के अनुसार, वीसी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि, अब तक इस प्रकार के जितने भी काम हुए हैं उन सबको एक प्लेटफार्म पर लाकर समयबद्ध निस्तारण किया जाए।।

आवंटित भूमि पर कोई विवाद न हो यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष 5 सदस्यीय समिति गठित की गई

रिपोर्ट के अनुसार, उपाध्यक्ष ने 'जनता दर्शन' के दौरान प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की। इनमें से अधिकांश शिकायतों में कहा गया है कि बिक्री विलेख के माध्यम से केडीए द्वारा आवंटित भूमि विवादित थी और कब्जे के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता था। इन शिकायतों की प्रकृति के अनुरूप, प्राधिकरण ने कहा कि बिक्री-विलेख (सेल डीड) निष्पादन से पहले एक भौतिक निरीक्षण बेहतर होगा। नामित अधिकारियों को संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेने का भी काम सौंपा गया है ताकि भूमि या भवन पर कोई विवाद न हो।

इसके लिए उपाध्यक्ष ने विधि विभाग के अतिरिक्त सचिव/प्रभारी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति बनाकर एसओपी तैयार करने को भी कहा है। विशेष कार्य बल बिक्री विलेखों (सेल डीड) के निष्पादन के चरणों का अध्ययन करेगा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि केडीए और आवंटियों के बीच कोई विवाद नहीं है। इसके संबंध में एक प्रक्रियात्मक रिपोर्ट समिति के सदस्यों द्वारा अगले 10 दिनों के भीतर तैयार की जानी है।