आईआईटी कानपुर ने अपनी अभिनव 'टेक फॉर ट्राइबल' पहल के लिए सर्वश्रेष्ठ उद्यमी कौशल प्रशिक्षण परियोजना (Best Entrepreneurial Skill Training Project) का पुरस्कार जीता है। आईआईटी कानपुर की प्रौद्योगिकी और बिजनेस इनक्यूबेटर, फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (FIRST) द्वारा विकसित यह कार्यक्रम आदिवासियों के समग्र विकास के उद्देश्य से शुरू किया गया है। कथित तौर पर, ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवेलपमेंट (TRIFTED) के 34 वें स्थापना दिवस पर आयोजित प्रथम वन धन वार्षिक पुरस्कार में इस कार्यक्रम को सम्मानित किया गया।

जनजातीय व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर ले जाने की एक पहल

आईआईटी कानपुर के इन्क्यूबेटर सेल (incubator cell) के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड रिसर्च इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (FIRST) द्वारा 'टेक फॉर ट्राइबल्स', भारत में आदिवासियों के समग्र विकास के उद्देश्य से शुरू किया गया है। यह 'आत्मनिर्भर' भारत बनाने के सपने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कथित तौर पर, 'FIRST' ने अपने उद्देश्य को पूरा करने लिए इस कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ और केरल में दो पीएमयू स्थापित किए हैं। इसका उद्देश्य वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) के माध्यम से संचालित स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उद्यमिता विकास, सॉफ्ट स्किल्स, सूचना-प्रौद्योगिकी (IT) एवं व्यावसायिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर ने घोषणा की, "इस कार्यक्रम में, आईआईटी कानपुर वन उत्पादों के मूल्यवर्धन और प्रोसेसिंग में बीओपी उद्यमिता (BoP Entrepreneurship) के लिए प्रासंगिक पाठ्यक्रम सामग्री के माध्यम से आदिवासी उद्यमियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।" उन्होंने कहा कि भारतीय आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह एक अनूठा कार्यक्रम है। करंदीकर ने एक ट्वीट में कहा, "इस अनूठी पहल में आईआईटी कानपुर द्वारा लाया गया तकनीकी परिवर्तन जनजातीय पारिस्थितिकी तंत्र (tribal ecosystem) को प्रभावित करने वाले बदलाव के एक प्रकाशस्तंभ के रूप में उभरा है।"

फाउंडेशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (FIRST) के सीईओ डॉ निखिल अग्रवाल ने कहा कि टेक फॉर ट्राइबल्स के माध्यम से हमने फाउंडेशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एफआईआरएसटी) में आदिवासी उद्यमियों को अपने व्यवसायों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया है। इसने आदिवासी उद्यमियों को व्यवसायीकरण के रास्ते पर लाने में मदद की है। यह उपलब्धि टीम को प्रेरित करेगी और कार्यक्रम के लाभार्थियों को और अधिक लाभ प्राप्त कराने के लिए उनके'टेक फॉर ट्राइबल्स', भारत में आदिवासियों के समग्र विकास के उद्देश्य से शुरू किया गया है। प्रयासों में ऊर्जा का संचार करेगी।