मुख्य बिंदु:

- 8 सितंबर को आईआईटी कानपुर ने भारतीय वायु सेना के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

- इस कार्यक्रम के तहत दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक ज्ञान और तकनीकी संसाधनों को साझा किया जाएगा।

- आईआईटी कानपुर, वायु सेना के अधिकारियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए सुविधाएं प्रदान करेगा।

- सेवानिवृत्त भारतीय वायुसेना अधिकारी, आईआईटी कानपुर में पीएचडी, एम.टेक और ई-मास्टर्स में सीधे प्रवेश के लिए पात्र होंगे।

8 सितंबर को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर ने एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए भारतीय वायु सेना के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम के तहत दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक ज्ञान और तकनीकी संसाधनों को साझा किया जाएगा। एक दीर्घकालिक सहयोग की मदद से, भारतीय वायु सेना और आईआईटी कानपुर मिलकर आत्मानिर्भर भारत के सिद्धांतों के आधार पर नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे।

नए और अभिनव विचारों को एक मंच प्रदान करने के लिए उठाया गया यह कदम


रिपोर्ट के अनुसार, इस साझेदारी से एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी (aerospace technology), विमान संरचनात्मक अखंडता (aircraft structural integrity), विमान स्वास्थ्य निगरानी (aircraft health monitoring) और अन्य संबंधित क्षेत्रों के क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा। आईआईटी कानपुर, वायु सेना के अधिकारियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए सुविधाएं प्रदान करेगा जिससे नए और आविष्कारशील विचारों को एक मंच मिलेगा।

इसके अलावा, आईआईटी कानपुर के छात्रों और शोधकर्ताओं को विमानन अधिकारियों की बेजोड़ विशेषज्ञता और अनुभव से सहायता मिलेगी। इसके अलावा, संस्थान के डॉक्टरेट शोधकर्ताओं को उपरोक्त क्षेत्रों में काम करने के लिए संसाधनों से लाभ मिलेगा। कथित तौर पर, रिसर्च स्कॉलर प्रोग्राम, दोनो संस्थानों की इस साझेदारी के तहत एक रूपरेखा विकसित करेगा। इसके एक भाग के रूप में, सक्षम सेवानिवृत्त भारतीय वायुसेना अधिकारी, आईआईटी कानपुर में पीएचडी, एम.टेक और ई-मास्टर्स में सीधे प्रवेश के लिए पात्र होंगे।

विकास के राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप, यह साझेदारी स्वतंत्र अनुसंधान की सुविधा प्रदान करेगा। इसके अलावा, यह रणनीतिक और बौद्धिक विशेषज्ञता वाले अधिकारियों के साथ अभिनव विचारों के निर्माण में मदद भी करेगी।