कमिश्नरेट पुलिस द्वारा शुरू किए जा रहे हार्स राइडिंग क्लब की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। अनुमान है कि 20 नवंबर के बाद इसका औपचारिक उद्घाटन हो सकता है। खास बात यह है कि, क्लब उसी ऐतिहासिक मैदान से संचालित होगा जहां 243 साल पहले कानपुर में घुड़सवारी की शुरूआत हुई थी।

शहर के लोग भी ले पाएंगे घुड़सवारी का आनंद

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के हार्स राइडिंग क्लब का खाका बनकर पूरी तरह से तैयार हो चुका है। क्लब में पुलिस व पुलिस परिवार के अलावा शहर के लोग भी घुड़सवारी का आनंद ले सकेंगे। इसके लिए उन्हें घंटे के हिसाब से किराया देना होगा। जानकारी के अनुसार, पुलिस के बेड़े में इस समय 19 घोड़े हैं, जिसमें 17 सक्रिय हैं, जबकि दो अधिक उम्र की वजह से रिटायर्ड हैं।

पुलिस विभाग ने पहले भी किया था क्लब का संचालन:

पुलिस विभाग हार्स राइडिंग क्लब पहले भी संचालित कर चुका है। दो नवंबर 1999 को तत्कालीन आइजी उत्थान कुमार बंसल ने हार्स राइडिंग स्कूल व क्लब की शुरूआत की थी, हालांकि यह क्लब चल नहीं सका और जल्द ही बंद हो गया। अब कमिश्नरेट पुलिस दोबारा इसकी शुरूआत करने जा रही है।

मैदान का ऐतिहासिक महत्व:

 सन 1719 से 1748 तक भारत में मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला का शासन था। बादशाह के दरबार में कोकी जुई नाम की प्रसिद्ध दरबारी थी, जिसकी आलमदारी गंगा के दक्षिण किनारे पर स्थित जाजमऊ से पुराने कानपुर तक फैली हुई थी। सन 1835 में जीटी रोड बन जाने के बाद जीटी रोड का उत्तरी क्षेत्र तो छावनी क्षेत्र ही रहा और लगभग समस्त दक्षिणी क्षेत्र जुई के नाम से जाना जाता रहा, जो बाद में बिगड़ कर जूही हो गया और आज भी इस क्षेत्र को जूही के नाम से जाना जाता है। प्रचलित है कि 1730 में जुई द्वारा इसी मैदान पर जहां यह हॉर्स राइडिंग क्लब स्थापित किया गया है एक बहुत बड़ा बंगला बनवाया गया था। सन 1778 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी के कानपुर आने पर कंपनी द्वारा जुई के इस बंगले में घुड़सवारी सिखाने के लिए राइडिंग स्कूल खोला गया था। साथ ही घोड़ा अस्पताल और घोड़ा लाइन की स्थापना भी की गई थी। इसीलिए यह मैदान और राइडिंग स्कूल ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

इनपुट: दैनिक जागरण

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